इन पार्टियों के बयान में कहा गया- ‘ईयू रैडिकल ताकतों के हाथों का खिलौना बनती जा रही है। ये ताकतें (देशों का) सांस्कृतिक और धार्मिक रूप बदलने की कोशिश कर रही हैं। अंतिम कोशिश राष्ट्र विहीन यूरोप बनाने की है। कोशिश यूरोपियन सुपर-स्टेट बनाने की हो रही है।’ गौरतलब है कि हाल ही ईयू ने यूरोप का भविष्य तय करने के लिए सम्मेलन आयोजित करने की शुरुआत की थी। 16 धुर दक्षिणपंथी पार्टियों की पहल को उसी सिलसिले में देखा जा रहा है। उनके बयान से साफ है कि ये पार्टियां इस बारे में ईयू के मंच पर हुई चर्चाओं से खुश नहीं हैं।
इन पार्टियों ने कहा है कि यूरोपीय राष्ट्रों को अपनी परंपरा के मुताबिक चलना चाहिए। उन्हें यूरोपीय संस्कृति और इतिहास का सम्मान करना चाहिए। उसे यूरोप की यहूदी-ईसाई विरासत और उन मूल्यों का सम्मान करना चाहिए, जो पूरे यूरोप को एकताबद्ध करते हैं। इन पार्टियों के रुख से साफ है कि वे गर्भपात जैसे नए बढ़े चलन से नाराज हैं। उन्होंने कहा है कि परिवार यूरोपीय देशों के अंदर बुनियादी इकाई हैं। इसलिए जिस समय जन्म दर गिर गई है, तब गर्भपात विरोधी नीतियां अपनाई जानी चाहिएं। ये नीतियां ही बड़े पैमाने पर आव्रजन को बढ़ावा देकर जनसंख्या बढ़ाने की प्रवृत्ति का जवाब होंगी।
विश्लेषकों के मुताबिक इन पार्टियो के बयान से साफ है कि उन्होंने ईयू की मुख्यधारा के खिलाफ मोर्चाबंदी कर ली है। उन्होंने आपसी मतभेदों और प्रतिद्वंद्विता के बावजूद आपस में हाथ मिलने के साझा बिंदुओं की तलाश कर ली है। पर्यवेक्षकों के मुताबिक कई मुद्दों पर इन पार्टियों के रुख में बहुत अंतर है। मसलन, मेरी ली पेन की नेशनल रैली पार्टी रूस के प्रति नरम रुख अपनाती है, जबकि पोलैंड की लॉ एंड जस्टिस पार्टी घोर रूस विरोधी है।
लॉ एंड जस्टिस की तरफ से यूरोपीय संसद के सदस्य रिसजार्द लेगुतको ने वेबसाइट पॉलिटिको.ईयू से कहा कि फिलहाल इन 16 पार्टियों का यूरोपीय संसद में एक गुट बनाने का कोई इरादा नहीं है। लेकिन नेशनल रैली पार्टी के नेता निकोलस बे ने इसी वेबसाइट से कहा कि जारी साझा बयान का मकसद आने वाले महीनों में एक व्यापक गुट का गठन है।
विश्लेषकों का कहना है कि धुर दक्षिणपंथी पार्टियों में भले आपसी मतभेद हों, लेकिन उनका एक मंच पर आना ईयू के लिए अच्छा संकेत नहीं है। इससे ईयू के भीतर वैचारिक खाई गहरा सकती है। इससे इस संगठन में अंदरूनी टकराव बढ़ सकता है।