इस्राइली पीएम नफ्ताली बेनेट अगले सप्ताह ग्लासगो में संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन से इतर भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को इस बात की जानकारी दी। मोदी और बेनेट की मुलाकात विदेश मंत्री एस. जयशंकर द्वारा पिछले सप्ताह इस्राइल यात्रा के दौरान मोदी की ओर से इस्राइली पीएम को भारत आने का निमंत्रण देने के बाद हुई है।
बेनेट को मोदी के निमंत्रण ने इस्राइल में काफी सुर्खियां बटोरीं क्योंकि इसे नई दिल्ली के यहूदी देश के साथ काम करने की सहजता के संकेत के रूप में लिया गया। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, बेनेट के अगले साल भारत आने की संभावना है। जयशंकर ने पांच दिनी इस्राइल दौरे पर वहां के टीवी चैनल (चैनल 12) को बताया था कि मुझे लगता है हमारे पास देशों के रूप में, राजनीति और समाज के रूप में उच्च स्तरीय सुविधाएं हैं और हमारे रिश्ते इस स्तर तक पहुंच गए हैं कि यह व्यक्तिगत स्तर से बहुत आगे जा चुके हैं।
दरअसल, जुलाई 2017 में प्रधानमंत्री मोदी की इस्राइल की ऐतिहासिक यात्रा में दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी आगे बढ़ी थी। ग्लासगो में नफ्ताली बेनेट यहां मोदी समेत कई वैश्विक नेताओं से मिलेंगे।
सीओपी-26 में दिखाई जाएगी कलाकार सौमिक दत्त की जलवायु पर बनी फिल्म
ब्रिटेन में रहने वाले भारतवंशी कलाकार और संगीतकार सौमिक दत्त की जलवायु परिवर्तन पर केंद्रित फिल्म ‘सांग्स ऑफ द अर्थ’ ग्लास्गो में अगले हफ्ते सीओपी-26 शिखर सम्मेलन में दिखाई जाएगी। यह उनके निर्देशन में बनी पहली फिल्म है। दत्त ने ‘अर्थ डे नेटवर्क’ के साथ एक फिल्म और संगीत परियोजना विकसित करने पर फरवरी में ब्रिटिश काउंसिल का जलवायु परिवर्तन पर ‘क्रिएटिव कमीशन’ जीता था।
बता दें कि ‘क्रिएटिव कमीशन’ जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए कला, विज्ञान और डिजिटल प्रौद्योगिकी को एक साथ लाता है और नवोन्मेषी समाधान पेश करता है। सौमिक दत्त की फिल्म का प्रीमियर दो नवंबर को ग्लास्गो में किया जाना है।
दत्त ने कहा, फिल्म और एल्बम के रूप में सवाल है कि क्या एक इनसान के तौर पर हमारा व्यवहार लंबे समय के लिए सही है। उन्होंने कहा, उपभोक्ता के तौर पर हममें से कई लोग खरीदने और छोड़ने के चक्र का हिस्सा है और कभी-कभी प्रदूषित महासागरों, कचरों के पहाड़ और जहरीली नदियां हमेशा वापस हमसे नहीं जुड़ते। मैं चाहूंगा कि युवा लोग ‘सॉन्ग्स ऑफ द अर्थ’ पर प्रतिक्रिया दें और यह सोचें कि कैसे वे अपने आसपास के पर्यावरण में छोटे-छोटे बदलाव ला सकते हैं तथा अच्छे नागरिक के तौर पर इस व्यवहार को महत्व देना शुरू करें।
प. बंगाल में आशा की जिंदगी पर बनी फिल्म
चौबीस मिनट की फिल्म का एनिमेशन भारतीय चित्रकार सचिन भट और अंजलि कामत ने किया है। यह पश्चिम बंगाल की युवा जलवायु शरणार्थी आशा की जिंदगी पर आधारित है जो सुंदरबन डेल्टा के बाढ़ग्रस्त तटों, जलते वनों और पिघलती ध्रवीय बर्फ से होती हुई अपने गुमशुदा पिता की तलाश में निकलती है। दत्त ने कहा, यह मेरी पहली लघु फिल्म है जिसकी कहानी मैंने लिखी, संगीत दिया और निर्देशन भी किया।