अमेरिका की एक सिविल सोसायटी संस्था ने अपनी एक रिपोर्ट में आरोप लगाया है कि दवा निर्माता कंपनी फाइजर ने कोविड-19 की अपनी वैक्सीन की बिक्री से जुड़ी बातचीत के दौरान कई देशों की सरकारों को धमकाया, उसने वैक्सीन की सप्लाई जानबूझ कर रोकी और अधिक से अधिक मुनाफा कमाने की कोशिश की। पब्लिक सिटिजेन्स नाम की इस संस्था ने मंगलवार को अपनी ये रिपोर्ट जारी की। इसमें कहा गया है कि फाइजर ने वैक्सीन सप्लाई के लिए जो अनुबंध किए, उनमें सार्वजनिक स्वास्थ्य पर कंपनी के हितों को तरजीह दी गई।
रिपोर्ट के लेखक जायन रिजवी ने एक बयान में कहा, 'बंद कमरों के भीतर फाइजर अपनी ताकत का इस्तेमाल सरकारों से कई प्रकार के लाभ प्राप्त करने के लिए करती है। विश्व समुदाय यह इजाजत नहीं दे सकता कि दवा कंपनियां मनमाना व्यवहार करें।' इस रिपोर्ट की शुरुआत फरवरी में जारी हुई एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए की गई है। उसमें कहा गया था कि जर्मन कंपनी बायोएनटेक के साथ मिल कर एमआरएनए तकनीक से कोविड टीका बनाने वाली फाइजर ने बिक्री की बातचीत के दौरान लैटिन अमेरिकी सरकारों को धमकाया था।
पब्लिक सिटिजेन्स की इस रिपोर्ट में बिक्री की शर्तों से संबंधित दस्तावेज, दस्तावेजों के प्रारूप और अंतिम अनुबंधों की कॉपी शामिल की गई है। ये अनुबंध अल्बानिया, ब्राजील, कोलंबिया, डोमिनिकन रिपब्लिक, यूरोपीय आयोग और पेरू के साथ हुए। पब्लिक सिटिजेन्स ने कुछ उन अनुबंध दस्तावेजों का भी अध्ययन किया, जिन्हें बाद में संशोधित किया गया था। ऐसा चिली, अमेरिका और ब्रिटेन के साथ हुआ था। अपने इन अध्ययनों के आधार पर इस संस्था ने फाइजर कंपनी के ऐसे तौर-तरीकों की पहचान की है, जिन्हें उसने आपत्तिजनक बताया है।
इसमें इसका जिक्र है कि इस साल के आरंभ में ब्राजील ने कहा था कि फाइजर कंपनी ने उस पर 'अनुचित और अपमानजनक' शर्तें थोपने की कोशिश की। आखिरकार ब्राजील ने ऐसा अनुबंध किया, जिसमें फाइजर को कानूनी प्रक्रिया से मुक्ति दी गई, देर से सप्लाई पर जुर्माने की शर्त हटाई गई, और ब्राजील सरकार इस बात पर राजी हुई कि भविष्य में किसी भी विवाद का निपटारा न्यूयॉर्क में निजी पंचाट में किया जाएगा। ब्राजील सरकार ने अनुबंध की शर्तों को गोपनीय रखने की बात भी स्वीकार की। ऐसा ही यूरोपीय आयोग व अमेरिका ने भी किया।
फाइजर ने ये शर्त भी थोपी कि उसकी इजाजत के बिना खरीदार देश उसकी वैक्सीन को किसी और देश को अनुदान के रूप में नहीं देगा। फाइजर ने जिस किसी देश को वैक्सीन बेची, उससे इसके बौद्धिक संपदा अधिकार की रक्षा का वादा लिया। उसने ये शर्त हर अनुबंध में थोपी कि विवाद का निपटारा प्राइवेट आर्बिट्रेशन से होगा। यानी संबंधित देश कोर्ट में नहीं जाएगा। साथ ही यह शर्त भी रखी गई कि विवाद को गोपनीय रखा जाएगा।
फाइजर ने ब्राजील, चिली, कोलंबिया, पेरू और डोमिनिकन रिपब्लिक आदि जैसे देशों के साथ अनुबंध में मुकदमे से मुक्ति का प्रावधान शामिल कराया। साथ ही उसने कई देशों के साथ अनुबंध में ये शर्त भी थोपी कि अगर सरकार ने उसे भुगतान नहीं किया, तो उसे सरकारी संपत्ति को जब्त करवाने का अधिकार होगा।