पेंटागन की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन अपने परमाणु अस्त्रों के भंडार में तेजी से बढ़ोतरी कर रहा है और 2030 तक उसके पास मौजूद परमाणु हथियारों की संख्या कम से कम 1000 तक पहुंच सकती है। यह रिपोर्ट उस वक्त आई है जब ताइवान समेत कई मुद्दों को लेकर अमेरिका और चीन के संबंधों में तनाव है। पेंटागन का कहना है कि साल 2027 तक चीन के पास 700 तक परमाणु अस्त्र हो सकते हैं और बीजिंग का इरादा 2030 तक 1000 परमाणु हथियार रखने का है।
वैश्विक महाशक्ति बनने की दिशा में चीन
रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन अत्याधुनिक तकनीक का महारथी बनने और नवोन्मेष में वैश्विक महाशक्ति बनने के लिए आक्रमक ढंग से आगे बढ़ रहा है। इसमें कहा गया है कि चीन अपनी भू, समुद्री और वायु आधारित परमाणु क्षमता प्रणाली की संख्या में बढ़ोतरी कर रहा है और अपनी परमाणु ताकत के विस्तार के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे का निर्माण कर रहा है।
भारत के खिलाफ चीन के आक्रामक रुख
इस रिपोर्ट में ताइवान, भारत के खिलाफ चीन के आक्रामक रुख तथा इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपीन और वियतनाम के विरुद्ध बीजिंग के कड़ा रुख रखने को लेकर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन अत्याधुनिक रिएक्टर और पुनसंवर्धन सुविधाओं का निर्माण कराकर प्लूटोनियम के निर्माण एवं इसे पृथक करने की क्षमता बढ़ा रहा है तथा इसके माध्यम से अपने परमाणु शक्ति के विस्तार में सहयोग ले रहा है।
पेंटागन का नया आकलन पिछले साल की उसकी रिपोर्ट के मुकाबले बहुत ज्यादा है क्योंकि पिछली रिपोर्ट में उसने कहा था कि एक दशक के भीतर बीजिंग के परमाणु अस्त्रों की संख्या करीब 400 हो सकती है।
पेंटागन की रिपोर्ट पूरी तरह पूर्वाग्रह से ग्रस्त : चीन
पेंटागन की रिपोर्ट पर चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि यह रिपोर्ट पूरी तरह पूर्वाग्रह से ग्रस्त और तथ्यों से परे है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने कहा कि अमेरिका को चीन के परमाणु खतरे को बढ़ा-चढ़ा कर बताना दुनिया को गुमराह करना है और कुछ नहीं। ग्लोबल टाइम्स के अनुसार अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस बात से पूरी तरह अवगत है कि यह लोगों को गुमराह करने का अमेरिका का चालाकी भरा कदम है।