द गार्जियन और वाशिंगटन पोस्ट समेत 16 मीडिया संस्थानों की संयुक्त जांच में पेगासस सॉफ्टवेयर से जासूसी कराने का दावा किया है। दावा किया जा रहा है कि भारत में 300 वेरिफाइड मोबाइल नंबरों पर पेगासस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया गया। विपक्ष ने इस मसले पर केंद्र सरकार को घेरना शुरू कर दिया है, लेकिन यह पहली बार नहीं है कि जब पेगासस सॉफ्टवेयर को लेकर घमासान छिड़ा है। दरअसल, 2019 के दौरान भी पेगासस सॉफ्टवेयर से जासूसी की बात सामने आई थी। उस वक्त कांग्रेस के दिग्गज नेता आनंद शर्मा और जयराम नरेश पेगासस पर सवालात को लेकर भिड़ गए थे।
2019 में क्या हुआ था?
बता दें कि 2019 के दौरान भी व्हाट्सएप के जरिए पेगासस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किए जाने की खबरें सुर्खियों में थी। उस वक्त कहा गया था कि सरकार ने इस्राइल से हैकिंग सॉफ्टवेयर पेगासस खरीदा और उससे करीब 100 नामचीन लोगों की जासूसी की गई। यह मामला सामने आते ही घमासान छिड़ गया था और सरकार बैकफुट पर नजर आई थी। उस वक्त संसद के दोनों सदनों में विपक्ष ने इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरा था।