आईसीआईजे और वाशिंगटन पोस्ट ने शाह अब्दुल्ला के बारे में जो जानकारी प्रकाशित की है, उस पर डीएलए पाइपर ने एक बयान जारी किया है। इसमें कहा गया है कि शाह अब्दुल्ला की जिन संपत्तियों का जिक्र किया गया है, उसमें कुछ भी अनुचित नहीं है। न ही उसके आधार पर कोई कानूनी कार्रवाई हो सकती है। पैंडोरा पेपर्स में ये ब्योरा दिया गया है कि शाह ने ऑफशोर (टैक्स हैवेन्स में दर्ज कराई गई) कंपनियों में अपने पैसे और जायदाद का निवेश किया है। इन दस्तावेजों में दुनियाभर के धनी-मानी देशों और कंपनियों के टैक्स चोरी के मकसद से ऑफशोर निवेश का विवरण दिया गया है। बताया जाता है कि इसको लेकर कई देशों में हलचल मची हुई है।
अमेरिका में ये मांग अब जोरशोर से उठ रही है कि अमेरिकी सरकार चोरी-छिपे होने वाले धन के अंतरराष्ट्रीय प्रवाह को रोकने के लिए कार्रवाई करे। अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में रिपब्लिकन पार्टी के सदस्य जॉन कर्टिस और डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्य टॉम मेलिनोवस्की ने एक संयुक्त बयान में कहा है- ‘पैंडोरा पेपर्स के सामने आने से ये साफ जाहिर हो गया है कि विदेशी भ्रष्टाचार लगातार एक बड़ा खतरा बना हुआ है।’ ये दोनों नेता टैक्स चोरी और विदेशी भ्रष्टाचार के खिलाफ कांग्रेस की समिति के सह-अध्यक्ष हैं।