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Pakistan: इमरान खान के खिलाफ सैन्य मुकदमे की याचिका खारिज, इस्लामाबाद HC ने कहा- सरकार ने कोई फैसला नहीं लिया

Tue, 24 Sep 2024 05:03 PM IST
बशु जैन वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद

सार

क्रिकेटर से राजनेता बने खान ने पिछले साल नौ मई को हुई हिंसा के मामले में सैन्य अदालत में सुनवाई के खिलाफ इस्लामाबाद हाईकोर्ट (आईएचसी) में याचिका दायर की थी। 
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पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान के खिलाफ सैन्य अदालत में मुकदमा चलाने की याचिका को इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। पूर्व पीएम की ओर से दायर याचिका पर कोर्ट ने कहा कि मुकदमे को लेकर अब तक पाकिस्तान सरकार ने कोई फैसला नहीं लिया है। 

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क्रिकेटर से राजनेता बने खान ने पिछले साल नौ मई को हुई हिंसा के मामले में सैन्य अदालत में सुनवाई के खिलाफ इस्लामाबाद हाईकोर्ट (आईएचसी) में याचिका दायर की थी। इस हिंसा में उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के समर्थकों ने उनकी गिरफ्तारी सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया था। 

न्यायमूर्ति मियांगुल हसन औरंगजेब ने मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान पाकिस्तान सरकार के अतिरिक्त अटॉर्नी जनरल मुनव्वर इकबाल दुग्गल ने बताया कि सरकार ने यह तय नहीं किया है कि खान को सैन्य मुकदमे का सामना करना पड़ेगा या नहीं। यदि इस तरह का कोई मुकदमा चलाया जाता है, तो इसे आवश्यक कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए नियम 549 के अनुसार तय किया जाएगा। उन्होंने अदालत को आगे बताया कि सैन्य मुकदमे की स्थिति में प्रक्रिया एक सिविल मजिस्ट्रेट से अनुरोध के साथ शुरू होगी।
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सरकार की प्रतिक्रिया के बाद इस्लामाबाद उच्च न्यायालय ने पीटीआई नेता के सैन्य मुकदमे से संबंधित याचिका को बंद कर दिया। सरकार द्वारा सैन्य मुकदमे की धमकी के बाद खान ने सेना में अपने संभावित स्थानांतरण को रोकने के लिए मंगलवार को इस्लामाबाद उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। खान ने तीन सितंबर को एक याचिका दायर की थी कि उन्हें नागरिक अधिकार क्षेत्र में रखा जाए।

उन्होंने याचिका में कानून सचिव, आंतरिक सचिव, इस्लामाबाद और पंजाब के महानिरीक्षक, संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) के महानिदेशक और जेल महानिरीक्षक को प्रतिवादी बनाया था। पूर्व प्रधानमंत्री ने याचिका में कहा कि अदालत अधिकारियों को उन्हें सैन्य हिरासत में सौंपने से रोकने का आदेश जारी करे और यह सुनिश्चित करे कि उनका मुकदमा नागरिक न्यायिक प्रणाली के भीतर ही रहे।

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