पाकिस्तान में ईशनिंदा की आरोपी एक ईसाई लड़की को जमानत मिलने के कई दिनों बाद सुरक्षा कारणों के चलते किसी अज्ञात स्थान पर भेजा गया है। इस विवादस्पद मामले में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जताई गयी थी। चौदह वर्षीय रिम्शा मसीह को शुक्रवार को एक अदालत ने जमानत दी थी।
सूत्रों ने बताया कि उसे सोमवार रात पुलिस लाइन मुख्यालय से किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया गया है। शनिवार को उच्च सुरक्षा वाली अदियाला जेल से रिहा किए जाने के बाद उसे और उसके परिवार को पुलिस मुख्यालय में रखा गया था। एक अन्य शहर से उसे पुलिस मुख्यालय के महिला बैरक में लाए जाने के लिए कड़े सुरक्षा प्रबंध किये गए थे। सोमवार रात इस बात को लेकर अटकलें लगायी जा रही थी कि रिम्शा और उनका परिवार पाकिस्तान से बाहर चला जाएगा। लेकिन राष्ट्रीय भाईचारा संबंधी प्रधानमंत्री के सलाहकार और ईसाई नेता पॉल भाटी ने कहा कि लड़की और उसके परिवार ने देश नहीं छोड़ा है।
भाटी ने मीडिया को बताया कि रिम्शा और उसके परिवार को किसी सुरक्षित जगह पर ले जाया गया है जिसे अधिकारियों ने चुना था। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने लड़की के दो बयान दर्ज किए हैं। पहला बयान 16 अगस्त को गिरफ्तारी के बाद पुलिस थाने में दर्ज किया गया और दूसरा अदियाला जेल में। पहले बयान में उसने धार्मिक पुस्तक के कुछ पन्ने फाड़े जाने और जलाने की बात स्वीकार की थी लेकिन दूसरे बयान में उसने ऐसा करने से इंकार किया था।
अधिकारी ने कहा कि जांच दल लड़की का एक अन्य बयान भी दर्ज करेगी क्योंकि कुछ सवाल अनुत्तरित रह गए हैं। इनमें ये सवाल शामिल हैं कि उसे धार्मिक साहित्य के पन्नों से भरा पालीथिन बैग कहां से मिला। इसके अलावा रिम्शा पर आरोप लगाने वाला व्यक्ति मलिक अहमद उसके घर के बाहर उस समय क्यों बैठा था जब उसने कथित तौर पर उस बैग को कूड़े के ढेर पर डाला।