पीएमएल-एन के करीबी माने जाते हैं अहद चीमा
प्रधानमंत्री के सलाहकार अहद चीमा को पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) का करीबी माना जाता है और उन्हें इमरान खान की सरकार के दौरान भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल में रखा गया था। लेकिन बाद में उन्हें दोषमुक्त कर दिया गया था।
वकील ने ईसीपी में दर्ज कराई थी शिकायत
चीमा और दो अन्य शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ वकील सैयद अजीजुद्दीन काका खेल ने अक्तूबर में पाकिस्तान के चुनाव आयोग (ईसीपी) में शिकायत दर्ज कराई थी और दलील दी थी कि इन लोगों के कार्यवाहक सरकार का हिस्सा होने के कारण चुनावों की पारदर्शिता संभव नहीं है। इसमें कहा गया, 'अगर सरकार पारदर्शी चुनाव चाहती है तो इन लोगों को उनके पदों से हटाया जाना चाहिए।' शिकायतकर्ता ने चीमा के अलावा निजीकरण और अंतर-प्रांतीय समन्वय मंत्री फवाद हसन फवाद और प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ तौकीर हुसैन शाह को भी हटाने की मांग की थी।
पारदर्शी चुनाव प्रभावित कर सकते हैं चीमा: ईसीपी
ईसीपी ने दलीलें सुनने के बाद कहा कि चीमा के खिलाफ याचिकाएं तर्कसंगत हैं और उन्हें इस आधार पर स्वीकार किया जाता है कि वह पिछली सरकार का हिस्सा रहे हैं। अगर वह अपने पद पर बने रहते हैं तो स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव प्रभावित कर सकते हैं।
चीमा को पद से हटाने, अधिसूचना जारी करने के आदेश
ईसीपी ने चीमा को उनके पद से हटाने का निर्देश दिया और कैबिनेट डिवीजन सचिव को इस मामले पर तुरंत अधिसूचना जारी करने का आदेश दिया। दिलचस्प बात यह है कि कार्यवाहक कैबिनेट में समी सईद, उमर सैफ, शाहिद अशरफ तरार और जहानजेब खान सहित पीएमएल-एन के साथ संबंध रखने वाले अन्य जाने-माने चेहरे हैं। वे अभी भी सरकार का हिस्सा हैं। जबकि ईसीपी ने उनके वर्तमान कार्यभार के खिलाफ स्पष्ट रुख अपनाया है। सितंबर में ईसीपी ने अंतरिम सरकार को सलाह दी थी कि वह कार्यवाहक प्रधानमंत्री के सचिव को लिखे एक पत्र में 'ज्ञात राजनीतिक निष्ठा वाले व्यक्तियों' को शामिल करने से परहेज करे।