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Jimmy Lai: चीन की नाक में दम करने वाले जिमी लाई कौन हैं, मीडिया टायकून पर क्यों लगे देशद्रोह के आरोप?

Tue, 19 Dec 2023 07:13 PM IST
ज्योति भास्कर वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग

सार

चीन का विशेष प्रशासनिक क्षेत्र हॉन्गकॉन्ग में ड्रैगन मीडिया टायकून जिमी लाई पर कानूनी शिकंजा कसा जा रहा है। जिमी लाई के खिलाफ नेशनल सिक्योरिटी ट्रायल शुरू किया गया है। 
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जिमी लाई - फोटो : amar ujala graphics
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विस्तार
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संयुक्त राष्ट्र की सूची में हॉन्गकॉन्ग को अलग देश की मान्यता प्राप्त नहीं है। इसे चीन के विशेष प्रशासनिक क्षेत्र के रूप में जाना जाता है। यहां प्रेस की आजादी को लेकर बहस हो रही है। रिपोर्ट के मुताबिक हॉन्गकॉन्ग के मीडिया टायकून जिमी लाई पर देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने के आरोप लगे हैं। चीन के वामपंथी नेताओं की आलोचना में मुखर रहे 76 साल के जिमी लाई को 2020 में भी गिरफ्तार किया गया था। 
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एक रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि जिमी के खिलाफ गवाही देने का दबाव बनाने के लिए लोगों को प्रताड़ित भी किया गया था। लोकतंत्र समर्थक की छवि रखने वाले मीडिया टायकून जिमी लाई चीन की वामपंथी सरकार के तमाम आरोपों को सिरे से खारिज करते हैं। जिमी लाई कौन हैं? उनके ऊपर कौन से आरोप लगे हैं? दुनिया के दूसरे देशों ने लाई पर हो रही कार्रवाई पर क्या प्रतिक्रिया दी है? आइये जानते हैं...
 

कौन हैं जिमी लाई?

चीन की नीतियों का विरोध, प्रेस की आजादी के लिए लड़े जिमी लाई - फोटो : ANI
जिमी लाई हॉन्गकॉन्ग के बड़े मीडिया घराने- एप्पल डेली के संस्थापक हैं। उनको चीन की नीतियों के चलते अपना मीडिया हाउस एप्पल डेली बंद करना पड़ा है। जिमी लाई का एक परिचय हॉन्गकॉन्ग में चीनी दबदबे का मुखर विरोध करने वाले शख्स के रूप में भी दिया जाता है। अपने मुखर विरोधियों से निपटने के लिए चीन ने हॉन्गकॉन्ग में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून जैसे सख्त कानूनी प्रावधान किए हैं। लाई पर इसी के तहत कार्रवाई की जा रही है। जिमी लाई अगर इस मामले में दोषी पाए जाते हैं तो उनको आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है।

 

जिमी लाई पर क्या आरोप लगे हैं?

हॉन्गकॉन्ग में प्रदर्शन(फाइल फोटो) - फोटो : Social Media
नेशनल सिक्योरिटी लॉ के तहत जिमी लाई पर देशद्रोह का आरोप है। अगर आरोप साबित होता है तो जिमी लाई की पूरी जिंदगी कालकोठरी में कट सकती है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक लाई के खिलाफ सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट लिखने के आरोप हैं। चार्जशीट के मुताबिक उन्होंने पश्चिमी देशों से चीन और हॉन्गकॉन्ग पर प्रतिबंध लगाने की अपील की है। अभियोजन पक्ष की दलील है कि उनके लेखों से राष्ट्रीय सुरक्षा कानून का उल्लंघन होता है।
जून, 2020 में चीन ने हॉन्गकॉन्ग में इन कानूनों को लागू किया था। इसके छह महीने बाद ही दिसंबर, 2020 में जिमी लाई को जेल में डाल दिया गया। जिमी को पहले प्री-ट्रायल डिटेंशन नीति के तहत हिरासत में रखा गया। इसके बाद एप्पल डेली से जुड़े अलग-अलग आरोपों के आधार पर उन्हें सजा भी सुनाई गई। भले ही सजाएं छोटी-छोटी अवधि की रहीं, लेकिन पिछले तीन साल में उनकी रिहाई नहीं हुई। चीन के ग्वांगझू प्रांत में जन्मे जिमी केवल 12 साल की आयु में मछुआरों की नाव में छिपकर हॉन्गकॉन्ग आ गए थे। मिठाई की दुकान में श्रमिक की तरह काम शुरू करने के बाद कुछ ही दशकों में जिमी लाई वहां के सबसे रईस आदमी बन गए।

कहां से शुरू हुआ जिमी लाई और एप्पल डेली का संघर्ष?

हिरासत में जिमी लाई (फाइल) - फोटो : ANI
हॉन्गकॉन्ग में अरबों डॉलर का साम्राज्य खड़ा करने वाले जिमी लाई लोकतंत्र के समर्थन में आवाज बुलंद करते रहे। चीन में वामपंथी सरकार की सख्त नीतियों से बेपरवाह होकर उन्होंने राष्ट्रपति शी जिनपिंग की विस्तारवादी नीतियों की मुखर आलोचना की। उन्होंने चीन की नीति, सेंशरशिप, प्रेस की आजादी पर अंकुश और तियानमेन नरसंहार पर जितना भी लिखा, वह चीन के लिए परेशानी का सबब साबित हुआ। चीन में लाई की किताबों के बिकने पर रोक लगा दी गई। इसके बाद एप्पल डेली और डिजिटल मैगजीन नेक्स्ट की शुरुआत हुई। दोनों को लोकतंत्र समर्थक प्रकाशन माना गया। यहीं से उनकी मुश्किलें भी शुरू हुईं। 
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अभी शुरू हुई अदालती कार्यवाही कितनी अहम?

सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला
चीन की दलील है कि संप्रभुता को चुनौती देने वाली ताकतों पर नकेल कसने के लिए यह कानून बनाया गया है। दूसरी ओर आलोचकों का कहना है कि असहमति को कुचलने के लिए ऐसे कठोर कानून बनाए गए हैं। कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में विशेषज्ञों ने लाई को जेल में डालने की आलोचना करते हुए कहा है कि इससे निष्पक्ष अदालती कार्यवाही के अधिकार का हनन होता है। 

ह्यूमन राइट्स वॉच के अनुसार, मीडिया टायकून जिमी लाई को जूरी के ट्रायल का मौका नहीं दिया गया है। इसके मुताबिक हॉन्गकॉन्ग में नेशनल सिक्योरिटी लॉ लागू होने से पहले कठोर दंड की आशंका वाले आरोपियों या बचाव पक्ष को जूरी के सामने अपनी दलीलें पेश करने का पूरा अवसर दिया जाता था। हॉन्गकॉन्ग में फिलहाल लाई का मामला चीन की वामपंथी हुकूमत की पसंद वाले तीन जजों के पैनल के सामने है। इन जजों को सत्ता का करीबी माना जा रहा है।

लाई के बेटे सेबेस्टियन ने कहा है कि ट्रायल दिखावे के लिए हो रहा है। बता दें कि चीन के आधिपत्य से पहले हॉन्गकॉन्ग ब्रिटिश कॉलोनी रहा था। चीन ने वादा किया कि कभी ब्रिटिश उपनिवेश रहा हॉन्गकॉन्ग 50 वर्षों तक पश्चिमी देशों की नागरिक स्वतंत्रता का आनंद ले सकता है। हालांकि, 1997 में चीनी शासन के अधीन आने के बाद बीते कुछ वर्षों में स्थानीय सरकार पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचलने के आरोप लगे हैं।
 
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