न्यायमूर्ति ईसा कार्यकाल 13 महीने का होगा जो 25 अक्तूबर 2024 को समाप्त होगा। पिछली परंपरा से हटते हुए ईसा ने उच्चतम न्यायालय (अभ्यास एवं प्रक्रिया) अधिनियम 2023 को चुनौती देने वाली याचिकाओं के एक सेट की लाइव स्ट्रीमिंग के साथ शुरुआत की, जिसके लिए अदालत के तीन वरिष्ठ न्यायाधीशों की एक समिति द्वारा सार्वजनिक महत्व के संवैधानिक मामलों पर पीठों के गठन की आवश्यकता होती है।
बंदियाल ने अंतिम फैसले तक कानून के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी थी और नए प्रधान न्यायाधीश ने पहले दिन एक पूर्ण अदालत पीठ का गठन किया और कार्यवाही शुरू की। कानून में कहा गया है कि सीजेपी और शीर्ष अदालत के दो वरिष्ठतम न्यायाधीश वाली तीन सदस्यीय पीठ यह तय करेगी कि किसी मामले को स्वत: संज्ञान में लिया जाए या नहीं। पहले, यह पूरी तरह से सीजेपी का विशेषाधिकार था।
इसके अलावा, उच्चतम न्यायालय के दायरे में पुनर्विचार के अधिकार को भी जोड़ा गया है, जिससे स्वत: संज्ञान मामलों में फैसले के 30 दिन के भीतर अपील दायर करने का अधिकार मिलता है। यह वही कानून है जिसे अगर बरकरार रखा जाता है तो पूर्व प्रधानमंत्री और पीएमएल-एन प्रमुख नवाज शरीफ को 2017 में उच्चतम न्यायालय द्वारा उन्हें चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराए जाने के खिलाफ अपील दायर करने की अनुमति मिल जाएगी।
पिछली परिपाटी से हटते हुए न्यायमूर्ति इसा ने पाकिस्तान के नए प्रधान न्यायाधीश के रूप में अपने पहले दिन के लिए शीर्ष अदालत में पहुंचने पर ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ लेने से भी इनकार कर दिया।