पाकिस्तान के एक प्रमुख समाचार पत्र ने अपनी खबर में बताया कि उच्च न्यायालय ने काकर को निर्देश दिया कि अगर वह 'बलूच जबरन गुमशुदगी आयोग' की सिफारिशों के अनुसार लापता छात्रों की बरामदगी सुनिश्चित नहीं करते हैं तो वह उसके समक्ष पेश हों। न्यायमूर्ति मोहसिन अख्तर कयानी ने जबरन गुमशुदगी के मामले में जांच आयोग की सिफारिशों को लागू करने से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।
लापता लोगों का पता लगाने और इसके लिए जिम्मेदार लोगों या संगठनों की जिम्मेदारी तय करने के लिए साल 2011 में इस आयोग का गठन किया गया था। एक अन्य समाचार पत्र की खबर के मुताबिक, इससे पहले 10 अक्तूबर को हुई सुनवाई में आईएचसी ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह लापता बलूच छात्रों को बरामद करने की अपनी जिम्मेदारी निभाए।
आज की सुनवाई में अतिरिक्त अटॉर्नी जनरल ने न्यायमूर्ति कयानी से अनुरोध किया कि वह मंत्रियों या प्रधानमंत्री को समन जारी न करें। उनके अनुरोध को अस्वीकार करते हुए न्यायाधीश ने कहा, इसमें (प्रधानमंत्री या मंत्रियों को समन जारी करने में) कुछ भी गलत नहीं है। हर कई इसका (गुमशुदगी के मामले का) मजाक बना रहा है।
उन्होंने आगे कहा, इस देश के लोगों के साथ इससे बड़ा अन्याय क्या होगा कि उन्हें गायब किया जा रहा है? लोगों की गुमशुदगी के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा, क्या हमें इस मामले को संयुक्त राष्ट्र को भेजना चाहिए और अपने देश का अपमान कराना चाहिए? अंतरिम प्रधानमंत्री ने पिछले महीने माना था कि संयुक्त राष्ट्र की एक उप-समिति के अनुमान के अनुसार बलूचिस्तान में करीब पचास लोगों को जबरन गायब कर दिया गया है।