इस डॉक्यूमेंट्री में मलाला को इस्लाम का विरोधी ठहराया गया है। स्कूल संगठनों ने कहा कि मलाला पश्चिमी देशों के एजेंडे को चला रही हैं और उनके इशारे पर इस्लाम के खिलाफ अनाप-शनाप बोल रहीं हैं। स्कूल संगठनों ने कहा कि मलाला शादी के खिलाफ बयान दे रही है, जो इस्लाम के खिलाफ है। उनका इरादा पश्चिमी देशों के एजेंडे पर चलते हुए इस्लाम को कमजोर करना है।
स्कूल संगठन बोले- छात्रों के सामने करेंगे बेनकाब
स्कूल संगठनों ने पाकिस्तान के दो लाख निजी स्कूलों के छात्रों के सामने मलाला को बेनकाब करने का अभियान छेड़ा है। स्कूल संगठनों ने कहा कि निजी स्कूलों के जरिये दो करोड़ छात्रों को लगातार मलाला के एजेंडे के बारे में बताया जाएगा और पूरे पाकिस्तान में उसे एक्सपोज किया जाएगा। स्कूल संगठनों ने कहा, 'हमारा लक्ष्य सााफ है कि हम मलाला को युवाओं के बीच एक्सपोज करना चाहते हैं ताकि मलाला के चक्कर में पाकिस्तान के युवा नहीं फंसे।'
मलाला का नाम स्कूली किताबों से हटाने की मांग
पाकिस्तान में मांग उठ रही है कि मलाला युसुफजई के बारे में किताबों में ना पढ़ाया जाए। यहां के पंजाब प्रांत में स्कूल की एक किताब में ‘पाकिस्तान के महत्वपूर्ण लोग’ वाले अध्याय में मलाला का नाम भी शामिल है। अब इस पर लोगों ने आपत्ति दर्ज कराई है।
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में प्रशासन ने एक स्कूल की उन किताबों को जब्त किया है, जिनमें नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई को महत्वपूर्ण शख्सियतों की सूची में शामिल दर्शाया गया था। इस कदम के पीछे ब्रिटेन में रह रही कार्यकर्ता के इस्लाम पर विवादास्पद बयानों के कारण पाकिस्तान की नाराजगी को माना जा रहा है।तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान नामक संगठन ने इस क्षेत्र में कई बार लड़कियों की पढ़ाई-लिखाई करने पाबंदियां लगाई हैं।
डॉन अखबार में मंगलवार को प्रकाशित खबर के मुताबिक, उसी दिन ‘पंजाब पाठ्यक्रम एवं पाठ्यपुस्तक बोर्ड’ (पीसीटीबी) ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस द्वारा प्रकाशित कक्षा सात की सामाजिक अध्ययन की पुस्तकें जब्त कर ली। इन पुस्तकों में 1965 भारत-पाक युद्ध में मारे गए सैन्य अधिकारी मेजर अजीज भट्टी और अन्य शख्सियतों के साथ मलाला का चित्र भी प्रकाशित किया गया था।