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इमरान ने टाला खतरा: क्या है पाकिस्तान का अनुच्छेद 5, जिसका हवाला देकर डिप्टी स्पीकर ने रद्द किया अविश्वास प्रस्ताव?

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Sun, 03 Apr 2022 03:24 PM IST

सार

नेशनल असेंबली में आज का दिन अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग के लिए निश्चित किया गया था। हालांकि, इस पर मतदान की जगह सदन की कार्यवाही को ही 25 अप्रैल तक के लिए भंग कर दिया गया। 
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पाकिस्तान में इमरान खान सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव रद्द। - फोटो : अमर उजाला/हिमांशु भट्ट


क्या है पाकिस्तान के संविधान का अनुच्छेद 5?

पाकिस्तान के 1973 में लिखे गए संविधान के अनुच्छेद 5 में रियासत के नाम वफादारी और संविधान-कानून के अनुपालन की बात करता है।


1. अनुच्छेद 5 का पहला क्लॉज कहता है- "पाकिस्तान के हर व्यक्ति का यह बुनियादी फर्ज है कि वह अपनी रियासत के प्रति वफादार रहेगा"


2. उधर इस अनुच्छेद का दूसरा क्लॉज कहता है- "संविधान और कानून का अनुपालन करना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है। चाहे वह पाकिस्तान में स्थायी तौर पर रह रहा हो या कुछ समय के लिए शरण लेकर आया हो।" 


इमरान सरकार ने कैसे बनाया अनुच्छेद 5 को हथियार?

नेशनल असेंबली में आज का दिन अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग के लिए निश्चित किया गया था। हालांकि, इस पर सबसे पहले इमरान सरकार के मंत्री फवाद चौधरी बोलने के लिए खड़े हुए। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 5(1) के तहत रियासत से वफादारी हर नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने इमरान खान के उन आरोपों को भी दोहराया, जिसमें कहा गया कि पाकिस्तान की सरकार को गिराने में विदेश से साजिश की जा रही है। 


उन्होंने कहा, "7 मार्च को हमारे आधिकारिक राजदूत को किसी और मुल्क के प्रतिनिधि ने बैठक के लिए बुलाया। बैठक में बताया गया कि इमरान खान के खिलाफ एक अविश्वास प्रस्ताव पेश होगा। यह बातचीत अविश्वास प्रस्ताव के पेश होने से एक दिन पहले हुआ।" चौधरी ने कहा, "हमें बताया गया कि पाकिस्तान के साथ रिश्ते अविश्वास प्रस्ताव की सफलता पर निर्भर होंगे। यह एक विदेशी सरकार की ओर से सत्ता बदलने का प्रयास है।"


अविश्वास प्रस्ताव पर क्या बोले स्पीकर?

इसी के बाद डिप्टी स्पीकर सूरी ने कहा- "किसी विदेशी ताकत को साजिश के जरिए चुनी हुई सरकार गिराने की इजाजत नहीं दी जा सकती।" उन्होंने चौधरी की तरफ से उठाए गए मुद्दे को वैध ठहराया और अविश्वास प्रस्ताव को रद्द करते हुए कहा कि यह कानून, संविधान और नियमों के खिलाफ है।
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