पाकिस्तान के कराची में बीते शुक्रवार हुए विमान हादसे की एक अहम वजह सामने आई है। नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने कहा है कि विमान चालक दल को दो बार चेतावनी दी गई, जिसे पायलट ने नजरअंदाज कर दिया। यही हादसे की सबसे बड़ी वजह रही। बता दें कि इस दुर्घटना में 97 लोगों की मौत हो गई, केवल दो लोग ही जिंदा बच पाए।
पाकिस्तान नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने हादसे के संबंध में कहा है कि पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (पीआईए) के पायलट ने विमान की ऊंचाई और गति के बारे में जारी की गई चेतावनी को नजरअंदाज कर दिया था, क्योंकि उसका मानना था कि विमान उतरने के लिए तैयार है।
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जिओ न्यूज ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि दुर्घटनाग्रस्त विमान ए320 एयरबस में 99 लोग सवार थे, इनमें से 97 की मौत हो गई और दो लोग ही बचे। रिपोर्ट के अनुसार, हवाई यातायात नियंत्रण कक्ष की ओर से पायलट को करीब ढाई बजे जब हवाई पट्टी से उसकी दूरी सिर्फ 15 नॉटिकल मील बची थी, पहली चेतावनी जारी की गई। इसमें कहा गया कि पायलट विमान को 7000 फीट से 10000 फीट की ऊंचाई पर ले जाए।
परंतु पायलट की ओर से जवाब मिला कि वह विमान की इस ऊंचाई से संतुष्ट है और प्लेन को सुरक्षित ढंग से उतार लेगा। इसके बाद जब विमान की हवाई पट्टी से दूरी करीब 10 मील ही रह गई, तब एटीसी ने दूसरी चेतावनी दी, तब विमान 7000 फीट की ऊंचाई से 3000 फीट पर आ चुका था। इस बार भी पायलट को विमान को ऊंचाई पर ले जाने के लिए कहा गया। इस बार भी पायलट ने विमान को सुरक्षित उतार लेने की बात कही।
चश्मदीद ने कहा- तीन पर महसूस हुए थे झटके
हादसे में बचे दो लोगों में से एक बैंक ऑफ पंजाब के प्रेसिडेंट जफर मसूद हैं और दूसरे मोहम्मद जुबैर। जुबैर ने हादसे के बारे में बताते हुए कहा कि विमान ठीक तरीके से उड़ रहा था, लेकिन लैंडिंग से ठीक पहले तीन बार झटके महसूस हुए थे। जुबैर का फिलहाल कराची के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है।
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जुबैर उन 99 यात्रियों में से एक थे जो पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस के एयरबस ए-320 एयरक्राफ्ट से सफर कर रहे थे, जो एयरपोर्ट के पास घनी आबादी वाले इलाके में हादसे का शिकार हो गया था। हादसे में नौ बच्चों समेत 97 लोगों की मौत हो गई। फ्लाइट पीके-8303 ने लाहौर से उड़ान भरी थी और कराची के जिन्ना एयरपोर्ट पर इसे लैंडिग करनी थी।