पाकिस्तान का तालिबान को खुले तौर पर समर्थन देना किसी से छिपा नहीं है, लेकिन अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना के वापस जाने के बाद पाकिस्तान ने पर्दे के आगे आकर अपना असली रंग दिखाना शुरू कर दिया है। जानकारी के अनुसार पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने अपने तालिबानी एजेंटो को निर्देश दिया है कि वे अफगानिस्तान में स्थित उन ठिकानों पर हमला करके उन्हें बर्बाद कर दें, जिन्हें भारत ने बनवाया है। अफगानिस्तान के सरकारी सूत्रों ने भी इस बात की पुष्टि की है। आपको बता दें कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान में तालिबान को खुलेआम समर्थन दे रहा है। तालिबान के साथ मिलकर पाकिस्तानी सेना के जवान भी अफगानिस्तान सरकार के खिलाफ लड़ रहे हैं।
भारत ने अफगानिस्तान में तीन अरब डॉलर का निवेश किया है
भारत सरकार ने पिछले कुछ सालों में अफगानिस्तान के विकास के तौर पर करीब तीन अरब डॉलर का निवेश किया है। इन पैसों से भारत ने न सिर्फ अफगानिस्तान की संसद भवन का निर्माण कराया बल्कि कई बांध भी बनवाए। इसके अलावा भारत ने बिजली और सड़क को लेकर कई योजनाएं भी चलाईं। पिछले 20 सालों में भारत सरकार ने अफगानिस्तान में डेलाराम से जारंग सलमा बांध के बीच 2018 किलोमीटर लंबे हाईवे का निर्माण करवाया है। इसके अलावा भारत ने ही 2015 में अफगानिस्तान संसद का लोकार्पण भी किया। इस संसद भवन का निर्माण अफगानिस्तान के लोगों के लिए भारत का सबसे बड़ा तोहफा है।
तालिबान का समर्थन कर रहे हैं पाकिस्तानी सैनिक
रिपोर्टों के अनुसार अफगानिस्तान के युद्धग्रस्त इलाकों में करीब 10 हजार से ज्यादा पाकिस्तानी सैनिक पहुंच चुके हैं, जो सीधे तौर पर तालिबान का समर्थन कर रहे हैं। पाकिस्तान की इस कार्यवाही का लक्ष्य अफगानिस्तान की निर्वाचित अशरफ गनी की सरकार का तख्तापलट करना है। अफगानिस्तान की सरकार ने कहा है कि भारत ने अफगानिस्तान में शिक्षा पर काफी ज्यादा निवेश किया है और कई स्कूलों और कॉलेंजों का निर्माण करवाया है, जिसे तबाह करने की कोशिश पाकिस्तान कर रहा है। हाल ही में भारत सरकार ने अफगानिस्तान में शहतूत बांध निर्माण करवाने की भी घोषणा की थी, जिसकी लागत करीब 350 मिलियन डॉलर है।
भारत, अफगानिस्तान की स्थिति पर रख रहा नजर
अफगानिस्तान सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में चलने वाले दर्जनों इस्लामिक आतंकी संगठनों के हजारों आतंकी अफगानिस्तान में तालिबान की मदद कर रहे हैं और इन्हें पाकिस्तान का पूरा समर्थन हासिल है। शुरू से ही भारत के खिलाफ रहे हक्कानी नेटवर्क को भी पाकिस्तान का पूर्ण समर्थन हासिल है। रिपोर्टों के अनुसार भारत, अफगानिस्तान की स्थिति पर पूरी तरह से नजर रखे हुए है। अफगानिस्तान एयरपोर्ट पर भी भारत के अधिकारी मौजूद हैं, जो स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। जानकारी के अनुसार तालिबान और भारत की बातचीत का अभी तक कोई फैसला नहीं निकला है।
इधर, अफगानिस्तान में काम करने वाले कामगारों को भारत सरकार ने वहां से निकाल लिया है। हालांकि, भारत की पब्लिक सेक्टर कंपनी डब्ल्यूएपीसीओएस के कई अधिकारी अभी भी अफगानिस्तान में मौजूद हैं और वहां एक बांध का निर्माण करवा रहे हैं।