विदेश नीति विश्लेषक बुसार्ट ने कहा, पाक सरकार व सेना में ऐसे कई लोग हैं, जो इस्लामिक कट्टरता का खुला समर्थन करते हैं। वह तालिबान की वापसी से खुश हैं और उसे अपना समर्थन दे रहे हैं। इसके चलते आगामी दिनों में पाक सरकार के कमजोर होने के आसार हैं और उसकी परमाणु तकनीक तक तालिबान की पहुंच हो सकती है।
प्रमुख राजनयिकों और सैन्य विशेषज्ञों द्वारा पाकिस्तान के परमाणु हथियार तालिबान के हाथ लगने की आशंका जताए जाने के बाद वैश्विक समुदाय की चिंताएं बढ़ गई हैं। विदेश नीति विश्लेषक फैबियन बुसार्ट ने द टाइम्स ऑफ इस्राइल में लिखा है, आतंकी संगठन परमाणु कार्यक्रम विकसित करने के इरादे जता चुका है और अफगानिस्तान-पाक के बीच खुली सीमा पर गतिविधियां बढ़ने लगी हैं।
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विदेश नीति विश्लेषक बुसार्ट ने कहा, समय रहते उठाने होंगे कदम
बुसार्ट के मुताबिक, पाक सरकार व सेना में ऐसे कई लोग हैं, जो इस्लामिक कट्टरता का खुला समर्थन करते हैं। वह तालिबान की वापसी से खुश हैं और उसे अपना समर्थन दे रहे हैं। इसके चलते आगामी दिनों में पाक सरकार के कमजोर होने के आसार हैं और उसकी परमाणु तकनीक तक तालिबान की पहुंच हो सकती है।
परमाणु हथियार बनाने की मंशा जाहिर कर चुके आतंकी संगठन ने इंजीनियर नजीबुल्लाह को अपना परमाणु ऊर्जा प्रमुख भी चुन लिया है। पाक शासन में दबदबा बनाकर अगर तालिबान ने उसे 150 परमाणु हथियार कब्जा लिए तो फिर दुनिया को तबाही का सामना करना होगा।
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लेखक का कहना है, खुद पाकिस्तान का परमाणु कार्यक्रम नीदरलैंड से चोरी की गई तकनीक पर आधारित है और देश में बड़ी तादाद में तालिबान समर्थक मौजूद हैं। ऐसे में वैश्विक समुदाय को समय रहते सावधानीपूर्वक कदम उठाने होंगे।