का मानना है कि सेना की मंशा के मुताबिक नवाज शरीफ की पार्टी को ही सत्ता में आने की पूरी भूमिका बनाई जा रही थी। लेकिन सेना का यह खेल तब बिगड़ना शुरू हुआ, जब इमरान खान की पार्टी से ताल्लुक रखने वाले समर्थकों की निगाहें ज्यादा चौकस हो गईं। प्रोफेसर भटनागर कहते हैं कि खैबर पख्तूनबा के तकरीबन 70 पोलिंग स्टेशन पर मतदान के दौरान जब गड़बड़ी की सूचनाएं आने लगीं, तो अलग-अलग राज्यों में इमरान के कार्यकर्ता वहां पहुंचने लगे। विशेषज्ञों का कहना है कि इसी वजह से पाकिस्तान की सेना का 'प्लान ए' फेल हो गया।
सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान के पंजाब, सिंध, खैबर पख्तूनबा और बलूचिस्तान में मतदान के बाद आधी रात को एक और बड़ा खेल किया गया। दरअसल बीती रात को डेढ़ बजे से लेकर सुबह चार बजे तक काउंटिंग को रोक दिया गया। कहा यही जा रहा है कि पाकिस्तान में इन ढाई घंटों के भीतर सियासत की पूरी तस्वीर बदली जाने लगी। सूत्रों की मानें तो मतगणना वाली रात एक बजे तक इमरान खान की पार्टी से ताल्लुक रखने वाले निर्दलीय प्रत्याशियों की जीत का सिलसिला बढ़ना शुरू हो चुका था। ऐसे में पाकिस्तान सेना की योजना का किला ढहता हुआ दिखने लगा था। बताया यही जा रहा है कि जब पाकिस्तान की सेना का मतगणना के दौरान प्लान ए फेल होने लगा, तो पहले से तय प्लान बी पर काम शुरू हुआ। इस प्लान के तहत नवाज़ शरीफ़ की पार्टी के साथ-साथ बिलावल भुट्टो की पार्टी के प्रत्याशियों के वोटों को बढ़ाने का फॉर्मूला अपनाया जाना था। सूत्रों के मुताबिक इसके लिए ही रात को ही ढाई घंटे का बड़ा खेल रचा गया।