पाकिस्तान में आठ फरवरी को हुए आम चुनावों के बाद से सियासी उठा पटक जारी है। पाकिस्तान के चुनाव आयोग ने एक बार फिर जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी समर्थित समर्थित सुन्नी इत्तेहाद काउंसिल (एसआईसी) को आरक्षित सीटें देने से मना कर दिया। उसने सुप्रीम कोर्ट में तर्क दिया कि एसआईसी आरक्षित सीटों के लिए योग्य नहीं है क्योंकि पार्टी गैर-मुस्लिमों को इसका हिस्सा नहीं बनने देती।
यह है मामला
दरअसल, पाकिस्तान के चुनाव आयोग ने खान समर्थित सुन्नी इत्तेहाद काउंसिल (एसआईसी) को आरक्षित सीटें देने से मना कर दिया था, जिससे नवाज शरीफ के नेतृत्व वाली पीएमएल-एन पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बन गई। इसके बाद एसआईसी ने हाईकोर्ट का रुख किया था, हालांकि वहां से भी उसे मायूस लौटना पड़ा। इस याचिका में पीटीआई के सांसदों ने आठ फरवरी के चुनावों के बाद राष्ट्रीय और प्रांतीय विधानसभाओं में महिलाओं और अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित सीटों के अपने हिस्से का दावा किया था। हालांकि, हाईकोर्ट से झटका लगने बाद सुन्नी इत्तेहाद काउंसिल ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
अब पाकिस्तान चुनाव आयोग (ईसीपी) ने सुन्नी इत्तेहाद काउंसिल (एसआईसी) की याचिका पर शनिवार को सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल किया। ईसीपी ने कहा कि एसआईसी को आरक्षित सीटें आवंटित नहीं की जा सकतीं क्योंकि पार्टी 24 दिसंबर की समय सीमा तक आरक्षित सीटों के लिए उम्मीदवारों की सूची जमा करने में विफल रही।
गैर-मुस्लिम व्यक्ति नहीं हो सकता पार्टी का सदस्य
चुनाव निगरानी संस्था ने कहा, 'एसआईसी के संविधान के अनुसार, कोई गैर-मुस्लिम व्यक्ति पार्टी का सदस्य नहीं बन सकता। एसआईसी के संविधान में गैर-मुस्लिमों को शामिल करने के खिलाफ प्रावधान असंवैधानिक है। सुन्नी इत्तेहाद काउंसिल महिलाओं और अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित सीटों का हकदार नहीं है।'
शीर्ष निकाय ने आगे कहा कि चुनाव के बाद स्वतंत्र उम्मीदवार एसआईसी में शामिल हो गए, जिसके बाद ईसीपी ने 4-1 बहुमत से पार्टी को आरक्षित सीटें आवंटित न करने का फैसला दिया और बाद में पेशावर उच्च न्यायालय (पीएचसी) ने इस फैसले को बरकरार रखा। एसआईसी आरक्षित सीटों के लिए पात्र नहीं है। एसआईसी को आरक्षित सीटें नहीं देने के ईसीपी और पीएचसी के फैसले में कुछ भी गलत नहीं है। यह निर्णय कानूनों और संविधान के अनुरूप है।
बहुमत के आंकड़े से रहे दूर
पाकिस्तान के चुनाव आयोग ने 71 साल के खान की पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ (पीटीआई) समर्थित सुन्नी इतेहाद काउंसिल (एसआईसी) को आरक्षित सीटें देने से इनकार कर दिया था। आयोग का कहना था कि एसआईसी के पाले वालीं आरक्षित सीटें अन्य दलों को दे दी जाएं। दरअसल, पीटीआई समर्थित निर्दलीय उम्मीदवारों ने चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें अपने नाम की थीं, लेकिन वे बहुमत के आंकड़े को नहीं छू पाए थे। इस वजह से पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएलएन) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) ने घोषणा कर दी थी कि वे गठबंधन सरकार बनाएंगे। हालांकि, पीटीआई ने पीएमएलएन और पीपीपी द्वारा गठबंधन सरकार बनाने के प्रयासों को खारिज कर दिया था।
किस पार्टी ने कितनी जीती थीं सीटें
चुनावों में जेल में बंद इमरान खान की पीटीआई पार्टी की ओर से समर्थित उम्मीदवारों समेत कुल 93 निर्दलीय प्रत्याशियों ने नेशनल असेंबली की सीटें जीती थीं। पीएमएल-एन ने 75 सीटें जीतीं, जबकि पीपीपी 54 सीटों के साथ तीसरे स्थान पर रही थी। मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट पाकिस्तान (एमक्यूएम-पी) ने भी 17 सीटों पर जीत दर्ज की थी। यहां सरकार बनाने के लिए किसी पार्टी को 266 सदस्यीय नेशनल असेंबली में लड़ी गई 265 सीटों में से 133 सीटें चाहिए होंगी। कुल मिलाकर, संसद के निचले सदन की 336 सीटों में से 266 सीटों के लिए चुनाव हुए थे। अन्य 60 सीटें महिलाओं के लिए और 10 सीटें अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित थीं।
एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) ने पिछले महीने हुए आम चुनाव के बाद शुरुआत में 75 सीटों पर जीत दर्ज की थी और उसमें नौ निर्दलीय उम्मीदवार शामिल हुए थे। इसे महिलाओं के लिए 19 आरक्षित सीटें और अल्पसंख्यकों के लिए चार आरक्षित सीटें आवंटित की गईं, जिससे इसकी कुल संख्या 107 हो गई थी।
पीटीआई समर्थित अंतरिम सुरक्षा परिषद (आईएससी) को आरक्षित सीटें देने से ईसीपी के इनकार के बाद तीन बार प्रधानमंत्री रह चुके नवाज शरीफ नीत पीएमएल-एन को महिलाओं के लिए आरक्षित 20 सीटों में से 15 सीटें और अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित तीन सीटों में से एक सीट आवंटित की गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल 123 सीट के साथ नेशनल असेंबली में नवाज शरीफ की पार्टी सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बन गई है।
पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) को मिली सीटों की संख्या भी पहले की 68 सीटों से बढ़कर 73 हो गई है। पूर्व वित्त मंत्री बिलावल भुट्टो-जरदारी के नेतृत्व वाली पार्टी ने शुरू में 54 सामान्य सीटें जीतीं और उसे अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित 12 सीटें और महिलाओं के लिए दो सीटें आवंटित की गईं। इसके बाद इसे महिलाओं के लिए आरक्षित चार और अल्पसंख्यकों के लिए एक सीट आवंटित की गई थी।
मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट पाकिस्तान (एमक्यूएम-पी) पार्टी के नेशनल असेंबली में 22 सदस्य हैं जबकि जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (एफ) के सांसदों की संख्या सात से बढ़कर 11 हो गई है।