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Pakistan: अदालत ने इमरान की हरकतों की आतंकवादी से की तुलना, कहा- साजिश के तहत करवाई 9 मई की हिंसा

Thu, 11 Jul 2024 09:54 PM IST
मेघा झा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
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पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान - फोटो : एएनआई (फाइल)
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जेल में बंद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की 9 मई की हिंसा से जुड़ी हरकतों को पाकिस्तानी अदालत ने आतंकवादी जैसी बताया है। इस मामले पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि पूर्व पीएम ने अपनी रिहाई के लिए दबाव बनाने के लिए पार्टी नेताओं पर हमला करने का काम सौंपा था।
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पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) संस्थापक इमरान खान और उनकी पार्टी के सहयोगियों पर मुकदमा चल रहा है। 9 मई 2023 को इमरान खान के समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन कर हिंसा की थी। इस दौरान पाकिस्तान में प्रमुख सैन्य प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचाया गया। यह विरोध प्रदर्शन इमरान खान को कथित भ्रष्टाचार के एक मामले में गिरफ्तार किए जाने के बाद पूरे पाकिस्तान में किया गया। विरोध के बाद हुई हिंसा के मामले में पीटीआई संस्थापक और उनके समर्थकों पर आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत एक मामला भी शामिल है, जिसमें पूरे पाकिस्तान में प्रमुख सैन्य प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचाया गया था।

बता दें कि 9 मई को हुई हिंसा में खान की पार्टी के कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर जिन्ना हाउस (लाहौर कोर कमांडर हाउस), मियांवाली एयरबेस और फैसलाबाद में आईएसआई बिल्डिंग सहित एक दर्जन सैन्य प्रतिष्ठानों में तोड़फोड़ की। रावलपिंडी में सेना मुख्यालय (जीएचक्यू) पर भी पहली बार भीड़ ने हमला किया। इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी ने आतंकवाद विरोधी अदालत के फैसले को बेतुका आदेश कहकर घोषणा की कि वह विरोध प्रदर्शन शुरू करेगी।
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अदालत ने दिया यह आदेश
इसके बाद लाहौर में आतंकवाद विरोधी अदालत (एटीसी) ने इस सप्ताह की शुरुआत में 9 मई के दंगों से संबंधित तीन मामलों में खान की अग्रिम जमानत खारिज कर दी। पुलिस को पूछताछ के लिए हिरासत में रखने की अनुमति दी थी। वहीं गुरुवार को जारी एक विस्तृत आदेश में एटीसी जज खालिद अरशद ने कहा, "अतिरिक्त अग्रिम जमानत एक निर्दोष व्यक्ति के लिए है, न कि याचिकाकर्ता इमरान खान नियाजी के लिए, जिसने सरकार को गिराने के लिए राज्य के खिलाफ युद्ध छेड़ने के समान उद्देश्य से वरिष्ठ पीटीआई नेतृत्व और प्रदर्शनकारियों/आरोपियों के साथ कथित आपराधिक साजिश रची और उसे अंजाम भी दिया।" अदालत ने माना कि इमरान खान ने न केवल लोगों को उकसाया, बल्कि नेताओं को अराजकता पैदा करने, कानून और व्यवस्था को बिगाड़ने और सेना और सरकार पर अपनी रिहाई के लिए दबाव बनाने के लिए आगजनी करने का निर्देश दिया। न्यायाधीश ने कहा, "याचिकाकर्ता की गिरफ्तारी-पूर्व जमानत में कोई दम नहीं है और उसे पहले से दी गई अंतरिम जमानत वापस लेते हुए उसे खारिज किया जाता है।"

शांतिपूर्ण प्रदर्शन बन गया आतंकवादी कदम
न्यायाधीश ने यह भी कहा कि एक शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी तब आतंकवादी बन जाता है जब उसके पीछे कोई साजिश रची जाए। उस साजिश को फैलाया जाए और अन्य आरोपियों को एक साथ किया जाए। जो हथियारबंद होकर लाहौर में जिन्ना हाउस के नाम से मशहूर लाहौर कोर कमांडर हाउस जैसी सरकारी संपत्तियों पर हमला करते हैं और उन्हें नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं, सरकारी मशीनरी को निशाना बनाते हैं। वह कानून का पालन करने वाले नागरिक होने का अपना सामान्य अधिकार खो देता है।"

7-8 मई को रची गई साजिश
विशेष सरकारी अभियोजक के हवाले से आदेश में कहा गया है कि 7 और 8 मई को खान के लाहौर जमान पार्क स्थित आवास पर एक आपराधिक साजिश रची गई थी। जिसमें इमरान खान ने खुद पीटीआई के शीर्ष नेतृत्व को गिरफ्तारी की आशंका और विरोध प्रदर्शन शुरू करने और सैन्य प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचाने की प्रतिक्रिया के बारे में बताया था। 

पीटीआई का दावा- हिंसा का आदेश देने का कोई सबूत नहीं
विस्तृत एसीटी आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए पीटीआई ने कहा, "फैसले में इमरान खान द्वारा 9 मई को हिंसा का आदेश देने का कोई सबूत नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि इमरान खान की गिरफ्तारी से पहले जमानत खारिज करते हुए न्यायाधीश ने अनुमान और धारणाएं बनाई हैं। पीटीआई ने अपने बयान में बताया कि कैसे पहले पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने इमरान खान की गिरफ्तारी को अवैध करार दिया था। उन्होंने कहा, "हम आतंकवाद निरोधी अदालत के फैसले को चुनौती देंगे।" रावलपिंडी, सरगोधा आदि सहित देश के अन्य हिस्सों में आतंकवाद निरोधी अदालतों ने इमरान खान पर 9 मई की हिंसक घटनाओं को भड़काने का मुख्य आरोपी होने का आरोप लगाते हुए मामले को खारिज कर दिया है, इस तथ्य के आधार पर कि अभियोजन पक्ष के तर्क को साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं दिया गया है।
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