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बढ़ रहीं नजदीकियां: पाकिस्तान और रूस रक्षा-सहयोग बढ़ाने पर सहमत, सैन्य संपर्क समिति की बैठक में लिया फैसला

Fri, 01 Oct 2021 04:06 PM IST
सुभाष कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद

सार

रूस के उप-रक्षा मंत्री एलेक्जेंडर फोमिन ने इस्लामाबाद के साथ हुए द्विपक्षीय सैन्य संपर्क समिति की बैठक में कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध और रक्षा सहयोग क्षेत्र की सुरक्षा के लिए अहम है।
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पाकिस्तान और रूस ने रक्षा-सहयोग को बढ़ाने के लिए जताई सहमति। - फोटो : social media
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विस्तार
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रूस और पाकिस्तान की नजदीकियां दिनों दिन अब बढ़ती ही जा रहीं है। यह परिणाम कहीं न कहीं भारत और रूस के रिश्तों के बीच आई दूरियों का नतीजा है। रूस की एक समाचार एजेंसी के मुताबिक रूस और पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने इस बात का खुलासा किया है। दोनों मुल्कों ने रक्षा सहयोग को बढ़ाने के लिए सहमति जताई है।
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रूस के उप-रक्षा मंत्री एलेक्जेंडर फोमिन ने इस्लामाबाद के साथ हुए द्विपक्षीय सैन्य संपर्क समिति की एक बैठक में यह बात कही है। फोमिन ने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध और रक्षा सहयोग क्षेत्र की सुरक्षा के लिए अहम है। पिछले कुछ सालों में पकिस्तान और रूस के रिश्तों में सरगर्मी बढ़ी है औररक्षा सहयोग को लेकर भी सहमति बनी है।

इमरान और पुतिन ने इसी महीनें की थी बात
इस 14 सितंबर को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन और पाकिस्तानी पीएम इमरान खान के बीच अफगानिस्तान के हालात को लेकर फोन पर बात हुई थी। इससे पूर्व भी 25 अगस्त को दोनों देशों के प्रमुख ने फोन पर शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइज़ेशन में सहयोग बढ़ाने को लेकर बातचीत की थी। इसके अलावा इमरान खान ने कहा था कि रूस और पाकिस्तान के बीच निवेश और व्यापार को लेकर बड़ी संभावनाएं हैं और दोनों देशों के बीच जारी गैस पाईपलाईन प्रोजेक्ट को जल्द से जल्द पूरा करना चाहता है।
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रूसी विदेश मंत्री ने भी किया था पाकिस्तान का दौरा
इस साल के अप्रैल में रूसी विदेश मंत्री सर्गेइ लावरोफ़ ने पाकिस्तान का दौरा किया था। यह पिछले 9 सालों में किसी भी रूसी विदेश मंत्री क पहलापाकिस्तान दौरा था। लावरोफ़ ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री के साथ एक साझा बयान में कहा था कि रूस पाकिस्तान को सैन्य आपूर्ति में मदद देगा।दोनों देशों के बीच सैन्य अभ्यास पर भी सहमति बनी थी। इसके अलावा पिछले साल पाकिस्तान के रक्षा मंत्री भी रूस के दौरे पर गए थे।

भारत पर असर
रूस और पाकिस्तान की नज़दीकी भारत-अमेरिका संबंधों में बढ़ती सरगर्मी का नतीज़ा है। चीन के खिलाफ़ रूस भारत का बड़े स्तर पर समर्थक नहीं है। इसलिए भारत और अमेरिका चीन पर लगाम कसने के लिए साथ आ रहें हैं। रूस का पाकिस्तान की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाना भारत पर दवाब बनाने की कोशिश है। हाल ही में सर्गेइ लावरोफ़ ने पश्चिमों देशों पर भारत को इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था।

दोनों देश रिश्तों पर असर से करते रहें हैं इंकार
हालांकि रूस और भारत दोनों देशों के नेता इस बात से इंकार करते हैं कि इन मुुद्दों का असर भारत और रूस के आपसी रिश्तों पर पड़ेगा। भारत कीनीति हमेशा ही सभी पक्षों के साथ लेकर चलने की रही है। अप्रैल महीनें में रूसी मिशन के डिप्टी चीफ रोमन बाबुश्किन ने भारत को ‘भरोसेमंद साथी’ बताते हुए कहा था कि दोनों देशों के बीच कई मतभेद या गलतफहमी नहीं है। भारत की तुलना में पाकिस्तान के साथ रूस के रिश्ते सीमित हैं।

इसके अलावा भारत ने रूस से एस-400, लड़ाकू विमानों और कई अन्य बड़े सौदे फाईनल किएं हैं जिससे पता चलता है कि भारत और रूस के रिश्तों में गर्मजोशी अब भी जारी है।
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