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Pakistan: अधिकारियों ने ध्वस्त किया अहमदी समुदाय का पूजा स्थल, मलबा भी उठा ले गए

Fri, 22 Dec 2023 10:17 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद

सार

Pakistan: लाहौर से करीब 130 किलोमीटर दूर फैसलाबाद के समुंदरी में अहमदी पूजा स्थल की मीनारों को शुक्रवार को पुलिसकर्मियों को ध्वस्त करते देखा गया। जमात-ए-अहमदिया पाकिस्तान के अधिकारी आमिर महमूद ने बताया कि अहमदी पूजा स्थलों का अनादर खुलेआम जारी है।
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अहमदी पूजा स्थल ध्वस्त। - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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पाकिस्तानी अधिकारियों ने शुक्रवार को पंजाब प्रांत में अल्पसंख्यक अहमदी समुदाय के 67 साल पुराने एक पूजा स्थल की मीनारों को ध्वस्त कर दिया। जमात-ए-अहमदिया पाकिस्तान के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। 

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पुलिस ने मीनारों को ध्वस्त कर दिया
लाहौर से करीब 130 किलोमीटर दूर फैसलाबाद के समुंदरी में अहमदी पूजा स्थल की मीनारों को शुक्रवार को पुलिसकर्मियों को ध्वस्त करते देखा गया। जमात-ए-अहमदिया पाकिस्तान के अधिकारी आमिर महमूद ने बताया कि अहमदी पूजा स्थलों का अनादर खुलेआम जारी है। शुक्रवार को पुलिस अधिकारियों ने सहायक आयुक्त के साथ मिलकर फैसलाबाद के समुंदरी में एक अहमदी पूजा स्थल की मीनारों को ध्वस्त कर दिया।

1956 में हुआ था अहमदी पूजा स्थल का निर्माण
जमात-ए-अहमदिया पाकिस्तान देश में अहमदी संप्रदाय का प्रतिनिधित्व करने वाला सर्वोच्च और एकमात्र निकाय है। उन्होंने कहा कि अहमदी पूजा स्थल का निर्माण 1956 में किया गया था और पिछले साल से कट्टरपंथी इस्लामवादियों से खतरा था। पाकिस्तान में अहमदी समुदाय को अक्सर उनकी धार्मिक प्रथाओं के लिए निशाना बनाया जाता है।

1974 अहमदियों को घोषित किया गैर-मुस्लिम
अहमदिया खुद को मुस्लिम मानते हैं। लेकिन 1974 में पाकिस्तान की संसद ने समुदाय को गैर-मुस्लिम घोषित कर दिया। एक दशक बाद उन्हें न केवल खुद को मुस्लिम कहने से प्रतिबंधित कर दिया गया। बल्कि इस्लाम के प्रथाओं का अभ्यास करने से भी रोक दिया गया। इनमें किसी भी प्रतीक का निर्माण या प्रदर्शन करना शामिल है, जो उन्हें मुसलमानों के रूप में पहचानता है जैसे कि मस्जिदों पर मीनार या गुंबद बनाना, या सार्वजनिक रूप से कुरान से आयतें लिखना।

मलबे को भी अपने साथ ले गई पुलिस
लाहौर उच्च न्यायालय का एक फैसला था जिसमें कहा गया था कि 1984 में जारी एक विशेष अध्यादेश से पहले बनाए गए पूजा स्थल कानूनी हैं और इसलिए उन्हें बदला या ध्वस्त नहीं किया जाना चाहिए। जमात-ए-अहमदिया पाकिस्तान ने कहा कि शुक्रवार को मीनारों को ध्वस्त करने के बाद पुलिस मलबा भी अपने साथ ले गई। अकेले इस साल अहमदी पूजा स्थलों की बेअदबी की यह 42वीं घटना है।

अहमदी पूजा स्थलों को निशाना बनाता है टीएलपी
महमूद ने कहा, 'पाकिस्तान में हमारे पूजा स्थलों को अपवित्र करने की कम से कम 42 घटनाएं इस साल पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों में हुई हैं, जिनमें से ज्यादातर पंजाब में हुई हैं।' तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) के कार्यकर्ताओं ने ज्यादातर अहमदी पूजा स्थलों पर हमला किया है। जबकि अन्य घटनाओं में धार्मिक चरमपंथियों के दबाव में पुलिस ने मीनारों और मेहराबों को ध्वस्त कर दिया और पवित्र लेखों को हटा दिया।

दिन-ब-दिन बदतर हो अहमदियों के लिए स्थिति
टीएलपी का कहना है कि अहमदी पूजा स्थल मुस्लिम मस्जिदों के समान हैं क्योंकि उनमें मीनारें हैं। महमूद ने कहा कि अहमदी पूजा स्थलों पर हमला करने और उन्हें नुकसान पहुंचाने के लिए धार्मिक चरमपंथियों के खिलाफ अब तक एक भी मामला दर्ज नहीं किया गया है। जमात-ए-अहमदिया पाकिस्तान ने कहा कि देश में पहले से ही हाशिए पर पड़े अहमदियों के लिए स्थिति दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है।
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मूकदर्शक बने हुए हैं अधिकारी
उन्होंने कहा, 'अहमदियों को असामाजिक तत्वों के हाथों उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। पाकिस्तान के विभिन्न इलाकों में पूजा स्थलों को अपवित्र करने की घटनाएं लगातार जारी हैं। यह एक नया नियम है और अधिकारी कुछ नहीं कर रहे हैं।'
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