पाकिस्तान की एक आतंकवाद रोधी अदालत ने गुरुवार को अपदस्थ प्रधानमंत्री इमरान खान की अंतरिम जमानत 12 सितंबर तक के लिए बढ़ा दी है। एक्सप्रेस ट्रिब्यून अखबार की रिपोर्ट के अनुसार न्यायाधीश राजा जवाद अब्बास हसन ने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी के प्रमुख इमरान को एक लाख रुपये के मुचलके पर जमानत दे दी। पिछले महीने इस्लामाबाद में एक रैली के दौरान 69 वर्षीय इमरान खान ने अपने सहयोगी शाहबाज गिल के साथ हुए दुर्व्यवहार को लेकर शीर्ष पुलिस अधिकारियों, चुनाव आयोग और राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ मामला दर्ज करने की धमकी दी थी। गिल को देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
इमरान ने न्यायाधीश जेबा चौधरी पर आपत्ति जताई थी
इमरान ने अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जेबा चौधरी पर भी आपत्ति जताई थी, जिन्होंने राजधानी क्षेत्र पुलिस के अनुरोध पर गिल की दो दिन की शारीरिक हिरासत को मंजूरी दी थी और कहा था कि उन्हें खुद को तैयार करना चाहिए क्योंकि उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। भाषण देने के कई घंटे बाद इमरान खान पर रैली में पुलिस, न्यायपालिका और अन्य राज्य संस्थानों को धमकी देने के लिए आतंकवाद विरोधी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था। आतंकवाद विरोधी अदालत ने 25 अगस्त को पीटीआई प्रमुख को 1 सितंबर तक 100,000 रुपये के मुचलके पर जमानत दी थी। खान ने पिछले हफ्ते महिला न्यायाधीश के खिलाफ अपनी विवादास्पद टिप्पणी वापस लेने की इच्छा दिखाई, लेकिन माफी मांगने से इनकार कर दिया।
इस्लामाबाद उच्च न्यायालय को भेजे गए एक लिखित जवाब में खान ने दावा किया कि भाषण के दौरान उन्हें पता नही था कि जेबा चौधरी एक न्यायिक अधिकारी हैं। उन्हें लगा था कि जेबा एक कार्यकारी मजिस्ट्रेट हैं। खान ने अदालत में अपने जवाब में कहा, प्रतिवादी विनम्रता के साथ बताना चाहता है कि यदि उसके द्वारा कहे गए शब्दों को अनुचित माना गया है, तो वह उन्हें वापस लेने को तैयार है। गुरुवार को इमरान खान कड़ी सुरक्षा के बीच इस्लामाबाद एटीसी पहुंचे और न्यायाधीश अब्बास के तहत कार्यवाही शुरू हुई, जिन्होंने अभियोजक को मामले में पहली सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) में जोड़े गए चार नए आरोपों में पीटीआई अध्यक्ष को अंतरिम जमानत देने का आदेश दिया।