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Gorbachev Funeral: गोर्बाचेव के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे पुतिन, मंगलवार को हुआ था निधन

Thu, 01 Sep 2022 04:32 PM IST
अभिषेक दीक्षित वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मॉस्को

सार

गोर्बाचेव का मंगलवार को निधन हो गया था। वे 91 वर्ष के थे। वे यूनाइटेड यूनियन ऑफ सोवियत सोशलिस्ट रिपब्लिक (USSR) के अंतिम नेता थे।
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a - फोटो : twitter @@KremlinRussia_E
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विस्तार
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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सोवियत संघ के अंतिम नेता मिखाइल गोर्बाचेव के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे। गोर्बाचेव का अंतिम संस्कार शनिवार को होना है। पुतिन ने गुरुवार को उन्हें श्रद्धांजलि दी। एक रिपोर्ट में इस बात का दावा किया जा रहा है। दरअसल, गोर्बाचेव का मंगलवार को निधन हो गया था। वे 91 वर्ष के थे।

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मिखाइल गोर्बाचेव यूनाइटेड यूनियन ऑफ सोवियत सोशलिस्ट रिपब्लिक (USSR) के अंतिम नेता थे। वह एक युवा और ओजस्वी सोवियत नेता थे, जो नागरिकों को स्वतंत्रता देकर लोकतांत्रिक सिद्धांतों की तर्ज पर कम्युनिस्ट शासन में सुधार करना चाहते थे। 1989 में जब साम्यवादी पूर्वी यूरोप के सोवियत संघ में लोकतंत्र समर्थक विरोध-प्रदर्शन तेज हो गए थे, तो भी गोर्बाचेव ने बल प्रयोग करने से परहेज किया था।

प्रेस और कलात्मक समुदाय को सांस्कृतिक स्वतंत्रता दी थी
उन्होंने ग्लासनोस्ट की नीति (पूर्व सोवियत संघ में 1985 में मिखाइल गोर्बाचेव द्वारा शुरू की गई सरकार को खुलकर सलाह देने और सूचना के व्यापक प्रसार की नीति) और भाषण की स्वतंत्रता को मान्यता दी थी, जिसपर उनके पहले के शासन के दौरान गंभीर रूप से अंकुश लगा दिया गया था। गोर्बाचेव ने पेरेस्त्रोइका या पुनर्गठन नामक आर्थिक सुधार का एक कार्यक्रम भी शुरू किया जो आवश्यक था, क्योंकि सोवियत अर्थव्यवस्था मुद्रास्फीति और आपूर्ति की कमी दोनों से जूझ रही थी। उनके समय में प्रेस और कलात्मक समुदाय को सांस्कृतिक स्वतंत्रता दी गई थी।
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गोर्बाचेव को 1990 में मिला था नोबेल शांति पुरस्कार
उन्होंने सरकारी तंत्र पर पार्टी के नियंत्रण को कम करने के लिए आमूल-चूल सुधारों की शुरुआत की थी। विशेष रूप से, उनके शासन के दौरान हजारों राजनीतिक कैदियों और उनके असंतुष्टों को रिहा कर दिया गया था। उन्हें संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ परमाणु निरस्त्रीकरण समझौते की सफलता के लिए जाना जाता है। राष्ट्रपति पद से हटने के बाद गोर्बाचेव को दुनियाभर में कई अवार्ड्स और सम्मान मिले। उन्हें 1990 में नोबेल शांति पुरस्कार भी मिला। शीत युद्ध को समाप्त करने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी, इसलिए उन्हें इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

सोवियत संघ टूटने के बाद भी गोर्बाचेव ने लड़ा था चुनाव
सोवियत संघ टूटने के बाद गोर्बाचेव को राष्ट्रपति पद से इस्तीफा देना पड़ा था। हालांकि उन्होंने कई बार कहा कि वो बिल्कुल नहीं चाहते थे कि सोवियत संघ का विघटन हो।सोवियत संघ टूटने के बाद गोर्बाचेव ने रूस में फिर चुनाव भी लड़ा, लेकिन उन्हें जबरदस्त हार का सामना करना पड़ा था। राष्ट्रपति पद के चुनाव में वह सातवें पायदान पर रहे। बाद में वह पुतिन के जबरदस्त आलोचक बन गए।

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