रिपोर्ट में कहा गया है- ‘हमारे देश की अर्थव्यवस्था वित्त आधारित हो गई है। इस दौरान पिछले दो दशकों में हमने देखा है कि जायदाद से होने वाला मुनाफा कई गुना बढ़ गया है।’ संस्था ने इसकी वजह डिजिटल अर्थव्यवस्था का प्रचलन में आना और सरकारी की मौद्रिक नीति को माना है।
रिपोर्ट के मुताबिक धन की गैर-बराबरी सबसे ज्यादा बड़े शहरों में है। मसलन, न्यूयॉर्क के मैनहटन में औसत आमदनी पड़ोसी इलाके ब्रॉन्स बॉरॉ की तुलना में दो गुना ज्यादा है। लेकिन मैनहटन के भीतर भी नस्लीय आधार पर आमदनी की गैर-बराबरी मौजूद है। जायदाद का मालिक होने के कारण श्वेत समुदाय के लोगों और एक हद तक एशियाई समुदाय के लोगों की आददनी ब्लैक और हिस्पैनिक (स्पेनी भाषी) लोगों से काफी ज्यादा है। यहां के ब्लैक और हिस्पैनिक लोगों की आमदनी राष्ट्रीय औसत से भी कम है।
इंक्लूसिव बिल्डिंग इनिशिएटिव ने गैर-बराबरी के कारण पैदा हो हुई समस्या के समाधान की एक योजना सुझाई है। उसके मुताबिक अमेरिका सरकार को निम्न आय वर्ग के लोगों के रिटायरमेंट खाते में उनके अपने योगदान के बराबर रकम जमा करानी चाहिए। इससे 30 हजार डॉलर सालाना कमाने वाले लोग जब रिटायर होंगे, तब उनके खाते में लगभग छह लाख डॉलर होंगे। इससे उनकी वृद्धावस्था ठीक से कटेगी। साथ ही सामाजिक सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों से उनकी मदद की जा सकती है।