भौतिकी का नोबेल जीतने वाले तीनों वैज्ञानिकों ने जो खोज की है उससे उन आणविक प्रक्रियाओं का अध्ययन किया जा सकेगा, जो तेजी से घटित होती हैं और जिनके बारे में अब तक सोचना भी मुश्किल लगता था। इसके अलावा कई अलग-अलग क्षेत्रों में इस खोज के संभावित अनुप्रयोग हो सकते हैं। मसलन, इलेक्ट्रॉनिक्स के लिहाज से इलेक्ट्रॉन के व्यवहार को समझना और नियंत्रित करना या एटोसेकंड पल्स का उपयोग विभिन्न अणुओं की पहचान करने के लिए करना, जिसका नैदानिक चिकित्सा क्षेत्र में उपयोग संभव है।
नोबेल विजेता पियरे ऑगस्टिनी अमेरिका की ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी में भौतिकी के प्रोफेसर हैं। फेरेंक क्रॉस्ज जर्मनी के मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट ऑफ क्वांटम ऑप्टिक्स के निदेशक हैं। ऐनी एल हुइलियर स्वीडन के लुंड विवि में आण्विक भौतिकी की प्रोफेसर हैं। तीनों वैज्ञानिकों ने पदार्थों में इलेक्ट्रॉन गतिशीलता के अध्ययन के लिए प्रकाश के एटोसेकंड पल्स तैयार करने के तरीके खोजे हैं।
अब हम इलेक्ट्रॉनों की दुनिया का दरवाजा खोल सकते हैं। एटोसेकंड भौतिकी हमें उन तंत्रों को समझने का अवसर देती है, जिनपर इलेक्ट्रॉन शासन करते हैं। हमारा अगला कदम उन तंत्रों का उपयोग करना होगा।
- ईवा ओल्सन, अध्यक्ष (भौतिकी की नोबेल समिति)
सेकंड की सूक्ष्मतम इकाई है एटोसेकंड
एटोसेकंड असल में सेकंड की सुक्ष्मतम इकाई है। एक सेकंड में उतने ही एटोसेकंड होते हैं, जितने करीब 31.71 अरब वर्ष में सेकंड होते हैं। दूसरे शब्दों में कहें, तो जितने सेकंड ब्रह्माण की उत्पति से अब तक बीत चुके हैं, उतने ही एटोसेकंड एक सेकंड में होते हैं। किसी भी अणु में इलेक्ट्रॉन एक एटोसेकंड के दसवें हिस्से में अपनी जगह बदलते हैं। हमें आणविक और उप आणविक कणों से जुड़ी संक्षिप्त घटनाओं के अध्ययन के लिए विशेष तकनीक की जरूरत होती है। पुरस्कार विजेताओं ने प्रकाश के इतने छोटे पल्स बनाने मे कामयाबी हासिल की है, जिन्हें एटोसेकंड में मापा जा सकता है। इन प्रकाश स्पंदनों (लाइट पल्स) का उपयोग परमाणुओं और अणुओं के अंदर प्रक्रियाओं की छवियां हासिल करने के लिए किया जा सकता है।
एनी हुइलियर भौतिकी में नोबेल जीतने वाली पांचवीं महिला
1901 से 2023 तक भौतिक के क्षेत्र में कुल 224 वैज्ञानिकों को नोबेल पुरस्कार दिया गया है। महिलाओं की बात करें तो इस साल की संयुक्त विजेता एनी हुइलियर के अलावा 1903 में मैरी क्यूरी, 1963 में मारिया गोएपर्ट-मेयर, 2018 में डोना स्ट्रिकलैंड और 2020 में एंड्रिया घेज को यह पुरस्कार मिला है। जॉन बारडीन को 1956 और 1972 में दो बार भौतिकी के लिए नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया है।