विक्रमसिंघे श्रीलंका के वित्त मंत्री भी हैं। आर्थिक सुधारों पर विपक्ष की कड़ी आलोचना के बीच उन्होंने कहा कि उन्होंने आईएमएफ कार्यक्रम का विकल्प चुना क्योंकि यही एकमात्र उलब्ध विकल्प सामने था। उन्होंने कहा, जो लोग दीर्घा को खुश करने के लिए बयान देते हैं, वे कड़े फैसले लेने के तैयार नहीं होते। मैंने आईएमएफ कार्यक्रम को चुना, क्योंकि यह एकमात्र विकल्प उपलब्ध था। उन्होंने सभी सियासी दलों से 2.9 अरब डॉलर के बेलआउट पैकेज को कमतर दिखाते हुए जिम्मेदारी के साथ काम करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि अतीत की आर्थिक गलतियों को सुधारने के लिए सुधारों को स्थापित करने के लिए कड़े निर्णय लेने पड़े। विक्रमसिंघे ने कहा, 'कुछ लोग कहते हैं कि वे आईएमएफ कार्यक्रम पर फिर से बातचीत करेंगे। यह झूठ है। विक्रमसिंघे ने कहा कि ऋण स्थिरता हासिल करने के लिए देश को अपना राजस्व बढ़ाना होगा। उन्होंने कहा कि राज्य के राजस्व को आईएमएफ के वांछित स्तर तक बढ़ाने के लिए वैट (मूल्य वर्धित कर) को 15 से 18 फीसदी तक बढ़ाना आवश्यक था।
श्रीलंका अभी भी आईएमएफ बेलआउट के लिए पुनर्भुगतान पर रियायतों के लिए बाहरी लेनदारों के साथ बातचीत कर रहा है। उन्होंने कहा, 'एक तरफ हमें भारत और पेरिस क्लब से बात करनी थी। चीन भी बात करने के लिए एक अन्य पक्ष था। हमने आईएमएफ की शर्तों के आधार पर उनके साथ बातचीत शुरू की।'
उन्होंने आगे कहा, हम भारत, चीन और पेरिस क्लब के सामने ऋण पुनर्गठन का स्वीकार्य कार्यक्रम पेश करने में सक्षम थे। हमने अमेरिकी वित्त मंत्री से बात की; इसके बाद जापान के प्रधानमंत्री, भारतीय प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री का नंबर आता है। मैं राष्ट्रपति शी और उनके वित्त मंत्री से बात करने के लिए चीन गया था।