राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल और प्रधान मंत्री पुष्प कमल दहल "प्रचंड" ने मंगलवार को विजयादशमी के अवसर पर नेपाल के नागरिकों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि ऐसे अवसरों ने नेपाल की सांस्कृतिक एकता और पहचान को बरकरार रखा है।
बता दें कि दशईं, 10 दिनों तक चलने वाला त्योहार है। नेपाल में देवी दुर्गा की पूजा के लिए मनाया जाने वाला ये त्योहार विजयादशमी के साथ खत्म होता है। दशईं त्योहार का आखिरी दिन दशहरा यानी विजयादशमी होता है।
राष्ट्रपति पौडेल ने कहा कि विजयादशमी बुराई पर सदाचार की जीत का प्रतीक है। उन्होंने कहा, समाज में आपसी सद्भावना, भाईचारा और पुनर्मिलन सभी को सामाजिक सद्भाव, एकता, एकजुटता, न्याय और समानता को बढ़ावा देने के लिए विजयादशमी के त्योहार से प्रेरणा मिलेगी।
उन्होंने कहा, "हमारे देश में बड़े उत्साह के साथ मनाए जाने वाले ऐसे त्योहारों ने हमारी सांस्कृतिक एकता और पहचान को अक्षुण्ण रखते हुए हमारी भौगोलिक, सांस्कृतिक और भाषाई विविधता को और मजबूत करने में योगदान दिया है।"
दशहरा के मौके पर नेपाल की जनता को शुभकामनाएं देते हुए, प्रधानमंत्री प्रचंड ने कहा कि नेपाल की सरकार देश को समृद्धि के पथ पर ले जाने और सुशासन और सामाजिक न्याय के संस्थागतकरण के साथ लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है।
उन्होंने कहा, "समृद्ध नेपाल के निर्माण के लिए सरकार के सभी प्रयासों को जनता का समर्थन बहुत महत्वपूर्ण है।" बता दें कि दशईं के दौरान हिंदू अनुष्ठानों के हिस्से के रूप में, नेपाल के अलग-अलग मंदिरों में जानवरों की बलि भी दी जाती है।
नेपाल के जनकपुर शहर में राजदेवी मंदिर में दशईं के 8वें और 9वें दिन 15,000 से अधिक बकरों की बलि दिए जाने की खबर सामने आई। खबरों के अनुसार, अष्टमी और नवमी के दिन की अहमियत भी नेपाल में विजयादशमी के समान ही है।