प्रचंड ने सुप्रीम कोर्ट को दिया यह लिखित जवाब
'काठमांडू पोस्ट' अखबार की खबर के मुताबिक, प्रचंड ने गुरुवार को शीर्ष कोर्ट को13 बिंदुओं में भेजे लिखित जवाब में कहा कि याचिका को रद्द किया जाना चाहिए, क्योंकि इसका कोई संवैधानिक आधार और कारण नहीं है। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका बयान नेपाल के संविधान के अनुच्छेद 17 (2) द्वारा गारंटीकृत भाषण और अभिव्यक्ति की आजादी के मौलिक अधिकारों का प्रयोग है और सभी नागरिक समान तरीके से अधिकार का उपयोग कर सकते हैं।
मेरा बयान पूरी तरह से राजनीतिक अभिव्यक्ति: पुष्प कमल दहल प्रचंड
प्रचंड ने कहा कि विद्रोही पक्ष द्वारा संघर्ष के समय हुई सभी मौतों की नैतिक जिम्मेदारी लेना व्यापक शांति समझौते और नेपाल के संविधान की भावना के खिलाफ है और उनका बयान पूरी तरह से एक राजनीतिक अभिव्यक्ति है और इसे न्यायिक प्रक्रिया से परे अभिव्यक्ति माना जाना चाहिए।
'माई रिपब्लिका' अखबार की खबर के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि वह सत्य एवं सुलह आयोग अधिनियम और जबरन गायब व्यक्ति अधिनियम पर जांच आयोग में समय पर संशोधन के जरिए युद्ध काल के मामलों के मुद्दों का समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ने की याचिकाओं को रद्द करने की मांग
नेकपा (माओवादी केंद्र) के प्रमुख ने यह भी कहा कि उन्होंने कभी भी उग्रवाद के दौर में हुई पांच हजार हत्याओं की जिम्मेदारी नहीं ली और उनके खिलाफ जांच की मांग करने वाली याचिकाओं को रद्द किया जाना चाहिए। प्रचंड ने कहा कि तीन साल पहले 5,000 मौतों की नैतिक जिम्मेदारी लेने का उनका बयान कुछ तबकों की ओर से यह धारणा बनाने के प्रयासों का जवाब था कि तत्कालीन विद्रोहियों नेकपा-माओवादी को उग्रवाद युग में हुई सभी 17,000 मौतों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
नेकपा प्रमुख का स्पष्टीकरण- नैरेटिव बनाने का किया प्रयास
उन्होंने कोर्ट को दिए अपने स्पष्टीकरण में कहा, यह नैरेटिव बनाने का प्रयास किया गया है कि विद्रोही पक्ष को जन युद्ध के दौरान हुई सभी मौतों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। उन्होंने कहा, 'मैंने उस नैरेटिव का मुकाबला करने के लिए बयान दिया था। उन्होंने शीर्ष कोर्ट के 'कारण बताओ नोटिस' के जवाब में अपने स्पष्टीकरण में कहा, राजनीतिक चर्चा, बहस और जवाबी बहस के दौरान दिए गए बयानों को न्यायिक समीक्षा के बाहर के मामलों के रूप में माना जाना चाहिए।
उग्रवाद के दौरान दस साल में मारे गए 17 हजार लोग
माओवादी उग्रवाद के पीड़ित वकील ज्ञानेंद्र अरन और 'कॉन्फ्लिक्ट विक्टिम्स कॉमन' के कार्यवाहक अध्यक्ष बुधाथोकी ने प्रधानमंत्री के खिलाफ आपराधिक जांच की मांग करते हुए दो अलग-अलग याचिकाएं दायर की थीं। 1996 और 2006 के बीच उग्रवाद के दौरान अनुमानित 17,000 लोग मारे गए थे।
तीन साल पहले प्रचंड ने दिया था ये बयान
प्रचंड ने कथित तौर पर 15 जनवरी, 2020 को कहा था कि उनकी पार्टी पर उग्रवाद के दौर में हुई सभी हत्याओं का झूठा आरोप लगाया जा रहा है और सामंती राजाओं ने 12,000 लोगों की हत्या की। उन्होंने कहा था, 'अगर आप जोर देते हैं तो मैं 5,000 की जिम्मेदारी लेता हूं। लेकिन, राज्य से 12,000 लोगों की मौत पर चर्चा न करना और सभी हत्याओं के लिए मुझे दोषी ठहराना अनुचित होगा।
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