नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली
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नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने एक कार्यक्रम में कहा कि पड़ोसियों के बीच कभी-कभार होने वाली समस्याएं स्वाभाविक हैं और उन्हें खुले मन से बातचीत के जरिए सुलझाया जा सकता है। पीएम ने एक पुस्तक विमोचन समारोह में ओली ने कहा, हम अपनी जमीन का इस्तेमाल अपने किसी भी पड़ोसी के खिलाफ नहीं होने देंगे।
'पड़ोसियों से हमारे अच्छे और मैत्रीपूर्ण संबंध'
उन्होंने कहा कि हिमालयी राष्ट्र ईमानदारी और तटस्थता का पालन करते हुए संतुलित तरीके से दोनों पड़ोसियों के साथ अच्छे और मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखता है। उन्होंने कहा, यदि हम मामले पर अधिक विस्तार से चर्चा किए बिना अंतरराष्ट्रीय दायित्वों को बनाए रखते हुए तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर न्यायोचित और उपयुक्त समाधान तलाशेंगे तो समस्या उत्पन्न नहीं होगी।
'हम समस्याओं का तटस्थ और शांतिपूर्ण समाधान चाहते हैं'
पीएम ओली ने कहा, हम संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों का पालन करते हैं और समस्याओं का तटस्थ और शांतिपूर्ण समाधान चाहते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आंतरिक कमजोरी को छिपाने के लिए हमेशा भूराजनीति को दोष देना उचित नहीं है।
ईपीजी रिपोर्ट को स्वीकार करने की कही बात
उन्होंने भारतीय पक्ष से नेपाल-भारत प्रतिष्ठित व्यक्ति समूह (ईपीजी रिपोर्ट) की तरफ तैयार की गई रिपोर्ट को स्वीकार करने को भी कहा, जिसमें अन्य बातों के अलावा 1950 की शांति और मैत्री संधि की समीक्षा से संबंधित मामला भी शामिल है। उन्होंने कहा कि इससे सीमा संबंधी मुद्दों और अन्य मामलों को सुलझाने के लिए बातचीत में सुविधा होगी।
चीन के बड़े समर्थक माने जाते हैं केपी शर्मा ओली
प्रधानमंत्री के रूप में अपने पिछले कार्यकाल के दौरान चीन के साथ व्यापार और पारगमन संधि पर हस्ताक्षर को याद करते हुए उन्होंने कहा कि यह वास्तव में एक बड़ी उपलब्धि थी। पीएम केपी शर्मा ओली को व्यापक रूप से चीन समर्थक माना जाता है, उन्होंने 2016 में पारगमन और परिवहन समझौते (टीटीए) पर हस्ताक्षर किए थे, जिससे चारों ओर से स्थल से घिरे हिमालयी देश को अपने विदेशी व्यापार के लिए चीनी समुद्र और स्थल बंदरगाहों तक पहुंच प्राप्त हुई थी।