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Nepal: 'भारत से दोस्ताना संबंध बनाए बिना नेपाल प्रगति नहीं कर सकता', केपी शर्मा ओली की पार्टी CPN-UML का बयान

Thu, 11 Jul 2024 10:22 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू

सार

Nepal: सीपीएन-यूएमएल की स्थायी समिति के सदस्य राजन भट्टाराई ने कहा कि उनकी पार्टी इस बात को नहीं मानती कि भारत विरोधी नीति अपनाकर नेपाल प्रगति कर सकता है या नेपाली लोगों के हितों को बढ़ावा दिया जा सकता है।
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नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी-एकीकृत मार्क्सवादी लेनिनवादी (सीपीएन-यूएमएल) के एक वरिष्ठ नेता ने गुरुवार को कहा कि चारों ओर से भू-सीमा से घिरे हिमालयी देश भारत के साथ करीबी दोस्ताना संबंध बनाकर ही आर्थिक समृद्धि हासिल कर सकता है। पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली पार्टी के एक वरिष्ठ नेता की टिप्पणी संसद में विश्वास मत की पूर्व संध्या पर आई है, जिससे उन्हें हिमालयी राष्ट्र के प्रधानमंत्री के रूप में एक बार फिर वापसी देखने को मिल सकती है। 

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विदेश मामलों के विभाग के प्रमुख और सीपीएन-यूएमएल की स्थायी समिति के सदस्य राजन भट्टाराई ने कहा, सीपीएन-यूएमएल इस बात को नहीं मानती कि भारत विरोधी नीति अपनाकर नेपाल प्रगति कर सकता है या नेपाली लोगों के हितों को बढ़ावा दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पार्टी के अध्यक्ष ओली 21वीं सदी की मांग के मुताबिक नेपाल-भारत संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाना चाहते हैं। 

उन्होंने कहा, हमारा मानना है कि हम भारत के साथ घनिष्ट मित्रवत संबंध बनाकर ही अधिक विदेशी निवेश आकर्षित कर सकते हैं। व्यापार को बढ़ावा दे सकते हैं और आर्थिक समृद्धि प्राप्त कर सकते हैं। हम भारत को एक महत्वपूर्ण पड़ोसी मानते हैं और हम अपनी धरती से भारत के खिलाफ किसी भी गतिविधि को अनुमति नहीं देंगे। 
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ओली को उनकी चीन समर्थक रुख के लिए जाना जाता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रतिनिधि सभा में कल शक्ति परीक्षण के बाद प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' को अपदस्थ करने के बाद अगर वह प्रधानमंत्री बनते हैं तो वह दोनों पड़ोसियों के साथ कैसे संबंध बनाए रखते हैं। भट्टाराई ने कहा, हमारी पार्टी का स्पष्ट मत है कि वह एक पड़ोसी का पक्ष लेकर दूसरे पड़ोसी के खिलाफ किसी गतिविधि को अनुमति नहीं देगा। 

हालांकि उन्होंने कहा कि 1950 की संधि के कुछ प्रावधानों के कारण द्विपक्षीय संबधों में कुछ समस्याएं, सीमा विवाद, सीमावर्ती क्षेत्रों में भूमि जलमग्न होना और बढ़ते व्यापार घाटे को सीपीएन-यूएमएल बातचीत के जरिए सुलझाना चाहती है। उन्होंने कहा, हम साथ बैठकर और दोस्ताना तरीके से बातचीत करके अपनी सभी समस्याओं का समाधान कर सकते हैं। 

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