क्षुद्रग्रह बेन्नू का नमूना
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नासा ने रविवार को एक बड़ी उपलब्धि हासिल की। दरअसल, अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी का एक कैप्सूल क्षुद्रग्रह बेन्नू का नमूना लेकर हमारी पृथ्वी पर उतरा है। धरती पर उतरे सैंपल से वैज्ञानिकों को सौर मंडल की उत्पत्ति के बारे में अधिक जानकारी हासिल करने में मदद मिलेगी।
नासा को इस सफलता के लिए सात साल का इंतजार करना पड़ा है। लिहाजा सवाल उठते हैं कि धरती पर उतरा नमूना क्या है? इसके लिए भेजा गया मिशन ओसिरिस-रेक्स क्या था? नमूने के धरती पर उतरने के बाद क्या हुआ? इससे वैज्ञानिकों को क्या हासिल होगा? इस नमूने की अहमियत क्या है? आइये समझते हैं...
क्षुद्रग्रह से नमूने लेकर धरती पर उतरा कैप्सूल
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पहले जानते हैं कि धरती पर उतरा नमूना क्या है?
नासा का एक कैप्सूल क्षुद्रग्रह बेन्नू का नमूना लेकर हमारी पृथ्वी पर उतरा है। इसे भारतीय समयानुसार रविवार रात 8.22 बजे पैराशूट के जरिये यूटा रेगिस्तान में उतारा गया। यह रेगिस्तान अमेरिकी रक्षा विभाग के यूटा परीक्षण और प्रशिक्षण रेंज में आता है।
एजेन्सी के मुताबिक, नमूने में करीब 250 ग्राम क्षुद्रग्रह चट्टानें और मिट्टी हैं। जब इस कैप्सूल ने पृथ्वी की वायुमंडल में प्रवेश किया, उस समय इसकी गति 44,498 किलोमीटर प्रति घंटा थी। इतनी गति बंदूक से निकली गोली से 15 गुना से भी अधिक मानी जाती है।
इस सफलता पर नासा प्रशासक बिल नेल्सन ने वैज्ञानिकों की टीम को बधाई दी। नेल्सन ने कहा, 'OSIRIS-REx टीम को बधाई। आपने यह किया। यह कुछ असाधारण चीज लेकर आया।' इसे पृथ्वी पर अब तक प्राप्त सबसे बड़ा क्षुद्रग्रह नमूना बताते हुए एजेंसी प्रमुख ने कहा, 'यह मिशन साबित करता है कि नासा बड़े काम करता है, ऐसी चीजें जो हमें प्रेरित करती हैं, ऐसी चीजें जो हमें एकजुट करती हैं। यह मिशन असंभव था जो संभव हो गया।'
बेन्नू क्षुद्रग्रह का नमूना
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अब जानते हैं ओसिरिस-रेक्स मिशन क्या था?
जिस मिशन के जरिए नासा ने यह कारनामा किया है वह OSIRIS-REx था। OSIRIS-REx का अर्थ ऑरिजिंस, स्पेक्ट्रल इंटरप्रिटेशन, रिसोर्स आइडेंटिफिकेशन, सिक्योरिटी, रेगोलिथ एक्सप्लोरर है। इस मिशन ने सात साल पहले 2016 में उड़ान भरी और 2018 में बेन्नू क्षुद्रग्रह की परिक्रमा शुरू की। 2020 में अंतरिक्ष यान ने नमूना इकट्ठा किया। अंततः पृथ्वी पर आने के लिए मिशन ने मई 2021 में अपना लंबा सफर शुरू किया। मिशन ने बेन्नू और वापसी तक कुल 6.22 अरब किलोमीटर की यात्रा की।
बेन्नू क्षुद्रग्रह का नमूना
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नमूने के धरती पर उतरने के बाद क्या हुआ?
चार हेलीकॉप्टरों ने रिकवरी और रिसर्च टीमों को लैंडिंग साइट पर पहुंचाया। यह सुनिश्चित करने के लिए टीम ने जांच की कि कैप्सूल किसी भी तरह से क्षतिग्रस्त नहीं हुआ था। टीम ने पुष्टि की कि लैंडिंग के दौरान कैप्सूल में कोई क्षति नहीं आई।
मिशन के कार्यक्रम प्रबंधक सैंड्रा फ्रायंड ने कहा कि महीनों से इस काम के लिए रिकवरी टीमें ट्रेनिंग ले रही हैं। इन्होने कैप्सूल के सुरक्षित होने पर उसे दोबारा कब्जे में ले लिया। कैप्सूल जब धरती पर प्रवेश किया तो इसका तापमान 2,760 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। टीम ने यह भी सुनिश्चित किया कि कैप्सूल की बैटरी न फटे और न ही कोई जहरीला धुआं लीक हो।
बाद में वैज्ञानिकों की एक टीम ने लैंडिंग स्थल से हवा, धूल और गंदगी के कणों सहित नमूने भी एकत्र किए। एरिजोना विश्वविद्यालय में मिशन के प्रमुख अन्वेषक डांटे लॉरेटा ने बताया कि मिशन के प्रमुख वैज्ञानिक उद्देश्यों में से एक पुराना नमूना वापस करना है। नमूने को लैंडिंग स्थल के पास एक अस्थायी साफ कमरे में पहुंचाया गया। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि मंगलवार को पहली बार नमूना देखने के लिए ढक्कन हटा दिया जाएगा।
बेन्नू क्षुद्रग्रह का नमूना
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नमूने से वैज्ञानिकों को क्या हासिल होगा?
जानकारी के मुताबिक, नमूने के बारे में विवरण देने के लिए 11 अक्तूबर को जॉनसन स्पेस सेंटर से नासा प्रसारण करेगा। वहीं शोधकर्ताओं की मंगलवार को नमूने से कुछ बारीक सामग्री इकट्ठा करने की योजना है। नासा से जुड़े वैज्ञानिक लॉरेटा ने बताया कि प्रारंभिक विश्लेषण में खनिजों और रासायनिक तत्वों की मौजूदगी का पता लगाया जाएगा।
जॉनसन स्पेस सेंटर के अंदर एक अलग साफ कमरे में वैज्ञानिक अगले दो वर्षों तक चट्टानों और मिट्टी का विश्लेषण करेंगे। नमूने को भी बांटा जाएगा और दुनियाभर की प्रयोगशालाओं में भेजा जाएगा। बता दें कि कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी और जापानी एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी भी मिशन के भागीदारों में हैं। लगभग 70 फीसदी नमूना भंडारण में मौलिक रहेगा ताकि भविष्य की पीढ़ियां बेहतर तकनीक के साथ अब जितना संभव हो सके उससे भी अधिक सीख सकें।
बेन्नू क्षुद्रग्रह का नमूना
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नमूना क्यों अहम है?
नमूने के साथ आईं चट्टानें और मिट्टी हमारे सौरमंडल की शुरुआत के बारे में अहम जानकारी दे सकती हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि बेन्नू जैसे कार्बोनेसियस क्षुद्रग्रह पृथ्वी के निर्माण के दौरान जल्दी ही ग्रह पर दुर्घटनाग्रस्त हो गए, जिससे पानी जैसे तत्व मिले।
वैज्ञानिकों का मानना है कि बेन्नु सौरमंडल की अपनी सबसे पुरानी सामग्री का प्रतिनिधि है जो विलुप्त हो रहे बड़े तारों और सुपरनोवा विस्फोटों में बनी है। इसी कारण से नासा छोटे पिंडों को समर्पित इन मिशनों में निवेश कर रहा है ताकि वैज्ञानिकों की समझ को बढ़ाया जा सके कि हमारा सौरमंडल कैसे बना।
नमूने के पृथ्वी पर उतरने से क्षुद्रग्रह के बारे में भी जानकारी मिल सकती है, जिसके भविष्य में पृथ्वी से टकराने की आशंका है। दरअसल, पृथ्वी के नजदीकी क्षुद्रग्रहों की संख्या के बारे में अधिक समझ अहम है जो अंततः हमारे ग्रह के साथ टकरा सकते हैं। उनकी संरचना और कक्षाओं की बेहतर समझ यह अनुमान लगाने में महत्वपूर्ण है कि कौन से क्षुद्रग्रह पृथ्वी के सबसे करीब आ सकते हैं।