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अमेरिका: जिन पांच कंपनियों के साथ पीएम की बैठक उनकी कुल नेटवर्थ 41 लाख करोड़ रु. से ज्यादा, जानें भारत के लिए क्यों अहम?

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन/न्यूयॉर्क Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Thu, 23 Sep 2021 03:17 PM IST

सार

मोदी की जिन बड़ी कंपनियों के सीईओ से मिलने की योजना है, उनमें क्वालकॉम, एडोबी, फर्स्ट सोलर, जनरल एटॉमिक्स और ब्लैकस्टोन शामिल हैं। खास बात यह है कि इन पांच कंपनियों में से दो के सीईओ भारतवंशी हैं।
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अमेरिकी कंपनियों के सीईओ के साथ पीएम मोदी की बैठक। - फोटो : Amar Ujala

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार अलसुबह अमेरिका पहुंच गए। अपने दौरे के पहले चरण में वे वॉशिंगटन में पांच अमेरिकी कंपनियों के सीईओ के साथ बैठक में हिस्सा लेंगे। इसके बाद पीएम ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन, अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस और जापान के प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा से द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।

मोदी की जिन बड़ी कंपनियों के सीईओ से मिलने की योजना है, उनमें क्वालकॉम, एडोबी, फर्स्ट सोलर, जनरल एटॉमिक्स और ब्लैकस्टोन शामिल हैं। खास बात यह है कि इन पांच कंपनियों में से दो के सीईओ भारतवंशी हैं। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिका दौरे पर प्रधानमंत्री की एपल के सीईओ टिम कुक से मिलने की भी योजना है। हालांकि, इस मुलाकात को लेकर अभी तक जानकारी साफ नहीं हो पाई है।

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अमेरिकी कंपनियों के सीईओ के साथ पीएम मोदी की बैठक। - फोटो : Amar Ujala
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार अलसुबह अमेरिका पहुंच गए। अपने दौरे के पहले चरण में वे वॉशिंगटन में पांच अमेरिकी कंपनियों के सीईओ के साथ बैठक में हिस्सा लेंगे। इसके बाद पीएम ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन, अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस और जापान के प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा से द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।

मोदी की जिन बड़ी कंपनियों के सीईओ से मिलने की योजना है, उनमें क्वालकॉम, एडोबी, फर्स्ट सोलर, जनरल एटॉमिक्स और ब्लैकस्टोन शामिल हैं। खास बात यह है कि इन पांच कंपनियों में से दो के सीईओ भारतवंशी हैं। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिका दौरे पर प्रधानमंत्री की एपल के सीईओ टिम कुक से मिलने की भी योजना है। हालांकि, इस मुलाकात को लेकर अभी तक जानकारी साफ नहीं हो पाई है।

तकनीक, रक्षा से लेकर ऊर्जा क्षेत्र की कंपनियों से मोदी की चर्चा

प्रधानमंत्री अमेरिका में जिन पांच बड़ी कंपनियों के अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे, उनकी कुल नेटवर्थ 555.41 अरब डॉलर (41.03 लाख करोड़ रुपये) से ज्यादा है। इनमें सबसे बड़ी कंपनी एडोबी है, जिसकी नेटवर्थ 305.51 अरब डॉलर (22 लाख 56 हजार करोड़ रुपये) है। इसके बाद नंबर आता है क्वालकॉम जिसकी नेटवर्थ 150.7 अरब डॉलर (करीब 11 लाख 11 हजार करोड़ रुपये) है। तीसरी बड़ी कंपनी ब्लैकस्टोन है, जिसकी नेटवर्थ 85.03 अरब डॉलर (करीब 6.28 लाख करोड़ रुपये) है। बाकी दोनों कंपनियों की नेटवर्थ 1 लाख करोड़ रुपए से कुछ कम है। हालांकि, ये दोनों कंपनियां भी अलग-अलग क्षेत्रों में अहमियत रखती हैं।


 

जानें कंपनियों और उनके सीईओ के बारे में?

1. एडोबी: शांतनु नारायण
एडोबी को पहले एडोबी सिस्टम्स के नाम से जाना जाता था। इसकी शुरुआत 1982 में हुई थी। इसका मुख्यालय अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित सैन होजे में है। एडोबी मुख्य तौर पर कंप्यूटर सॉफ्टवेयर कॉरपोरेशन है। यह कंपनी एडोबी इलस्ट्रेटर, एडोबी एक्रोबैट, एडोबी इनडिजाइन, एडोबी प्रीमियर और एडोबी फोटोशॉप जैसे दुनिया के कई बड़े और अहम सॉफ्टवेयर बना चुकी है।

कंपनी के सीईओ शांतनु नारायण भारतीय मूल के बिजनेस एग्जीक्यूटिव हैं। उनका जन्म भारत के हैदराबाद में हुआ था। उनकी इंजीनियरिंग की पढ़ाई हैदराबाद की ही ओस्मानिया यूनिवर्सिटी में हुई। 1993 में उन्होंने कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के हास स्कूल ऑफ बिजनेस से एमबीए पूरा किया। नारायण ने सिलिकॉन वैली में कई अहम कंपनियों के साथ काम किया और बाद में एडोबी से जुड़े। 2005 से 2007 तक उन्हें कंपनी के प्रेसिडेंट और चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (सीओओ) की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। नारायण दिसंबर 2007 से एडोबी के चेयरमैन और सीईओ बने हुए हैं।

मोदी के साथ बैठक क्यों अहम?
प्रधानमंत्री सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में भारत की कई कंपनियों और स्टार्टअप्स को वैश्विक स्तर पर ले जाने की चर्चा करते रहे हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री एडोबी के साथ निवेश से लेकर नई तकनीक के प्रसार पर चर्चा कर सकते हैं।

2. जनरल एटॉमिक्स ग्लोबल कॉरपोरेशन: विवेक लाल

जनरल एटॉमिक्स ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में अमेरिका की बड़ी रिसर्च कंपनी है। इसका मुख्यालय कैलिफोर्निया के सैन डिएगो में स्थित है। यह कंपनी परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में कई अहम रिसर्च में शामिल रही है। इसके अलावा रक्षा क्षेत्र में यह कंपनी सर्विलांस एयरक्राफ्ट से लेकर वायरलेस और लेजर तकनीक के रिसर्च और उत्पादन में शामिल है। कंपनी ने जिन अहम हथियारों पर काम किया है, उन्में प्रिडेटर ड्रोन्स के साथ एयरबोर्न सेंसर शामिल हैं।

विवेक लाल को 1 जून 2020 को जनरल एटॉमिक्स ग्लोबल कॉरपोरेशन के सीईओ का पद सौंपा गया था। इससे पहले वे 2014 से 2017 तक जनरल एटॉमिक्स से जुड़े रहे थे। विवेक लाल ने अमेरिकी एयरोनॉटिक्स कंपनी लॉकहीड मार्टिन के साथ भी लंबा अनुभव हासिल किया। भारत में उन्होंने बोइंग के डिफेंस एंड स्पेस ऑपरेशंस की जिम्मेदारी संभाली। लाल ने रिलायंस इंडस्ट्रीज में भी काम किया। उन्हें नासा के एम्स रिसर्च सेंटर में फेलोशिप भी मिली थी। उन्होंने अपनी पीएचडी कैंसस की विचिटा स्टेट यूनिवर्सिटी से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में हासिल की।

मोदी के साथ बैठक क्यों अहम?
ड्रोन तकनीक में भारत की बढ़ती दिलचस्पी को देखते हुए विवेक लाल के साथ पीएम मोदी की बैठक काफी अहम मानी जा रही है। दरअसल, भारत ने हाल ही में अमेरिका से ड्रोन तकनीक खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है। ऐसे में जनरल एटॉमिक्स भारत के ड्रोन अधिग्रहण के मकसद में अहम साबित हो सकती है। मौजूदा समय में अमेरिका बेहद कम देशों से अपनी ड्रोन तकनीक शेयर करता है, लेकिन विवेक लाल भारत और अमेरिका के बीच 18 अरब डॉलर से ज्यादा के रक्षा समझौते कराने में अहम चेहरा साबित हुए हैं।

3. क्वालकॉम: क्रिस्टियानो आर एमॉन

पीएम क्वालकॉम के सीईओ क्रिस्टियानो आर एमॉन से भी मुलाकात करेंगे। इस कंपनी की शुरुआत 1985 में हुई थी। इसका हेडक्वार्टर भी कैलिफोर्निया के सैन डिएगो में ही स्थित है। यह कंपनी मुख्य तौर पर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज में लगने वाले सेमीकंडक्टर (चिप मेकिंग), सॉफ्टवेयर टेस्टिंग और वायरलेस तकनीक से जुड़ी सेवाओं में अग्रणी है।

क्वालकॉम के मौजूदा सीईओ क्रिस्टियानो एमॉन इस वक्त कंपनी के प्रेसिडेंट हैं और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स का भी हिस्सा हैं। वे इसी साल 30 जून को सीईओ बनाए गए थे। क्वालकॉम में एमॉन का करियर 1995 में एक इंजीनियर के तौर पर शुरू हुआ था। कंपनी के 5जी तकनीक में आगे बढ़ने की मुख्य वजह एमॉन के सफल वेंचर्स को माना जाता है। वे क्वालकॉम से पहले ब्राजील के वायरलेस ऑपरेटर वेस्पर के चीफ टेक्निकल ऑफिसर और एरिक्सन में भी नेतृत्व के पदों पर रह चुके हैं।

मोदी के साथ बैठक अहम क्यों? 
मौजूदा समय में क्लाकॉम के पास 5जी, 4जी से जुड़े कई अहम पेटेंट्स हैं। भारत में चीनी कंपनियों से इतर 5जी टेस्टिंग को सुरक्षित बनाने और सेमीकंडक्टर मार्केट, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और क्लाउड कंप्यूटिंग में निवेश बढ़ाने के लिए पीएम की क्वालकॉम सीईओ से मुलाकात अहम मानी जा रही है।
 

4. फर्स्ट सोलर: मार्क विडमर

फर्स्ट सोलर कंपनी अमेरिका में सोलर पैनल्स बनाने का काम करती है। इस कंपनी के पास अमेरिका में फोटोवोल्टेयिक पावर प्लांट्स (सोलर प्लांट्स) बनाने के कई प्रोजेक्टस् हैं। इस कंपनी की शुरुआत 1990 में हुई थी और इसका मुख्यालय एरिजोना के टेंपा में स्थित है। 2011 में यह कंपनी फोर्ब्स की सबसे तेजी से बढ़ने वाली 25 कंपनियों की लिस्ट में पहले स्थान पर थी।

मार्क विडमर अप्रैल 2011 में फर्स्ट सोलर का हिस्सा बने थे। तब उन्हें चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर का पद सौंपा गया था। इसके बाद 2012 से 2015 तक उन्होंने इस कंपनी में चीफ एकाउंटिंग ऑफिसर का पद संभाला। विडमर को जुलाई 2016 में कंपनी का सीईओ नियुक्त किया गया। अपने कार्यकाल के दौरान विडमर को फर्स्ट सोलर का कारोबार बड़े स्तर पर ले जाने का श्रेय दिया जाता है। विडमर पहले लूसेंट टेक्नोलॉजी, एलाइड सिग्नल्स और ग्राफटेक इंटरनेशनल के लिए भी काम कर चुके हैं।

मोदी के साथ बैठक अहम क्यों?
मौजूदा समय में यह कंपनी अमेरिका और चीन के साथ भारत में भी पैर जमाने की कोशिश में है। भारत भी जलवायु परिवर्तन रोकने के अपने वादों के तहत नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ाने पर ध्यान दे रहा है। ऐसे में मोदी की बैठक स्वच्छ ऊर्जा में कई नई योजनाओं को आगे बढ़ाने में अहम साबित हो सकती है। एरिजोना की यह कंपनी पहले ही भारत में तैयार अपनी नई फैसिलिटी में 5 हजार करोड़ रुपये के खर्च से 3.3 गीगावॉट क्षमता बढ़ाने का एलान कर चुकी है।

5. ब्लैकस्टोन: स्टीफन श्वार्जमैन

ब्लैकस्टोन अमेरिका की वैकल्पिक निवेश प्रबंधन कंपनी है। इसका हेडक्वार्टर न्यूयॉर्क सिटी में है। इसकी शुरुआत 1985 में स्टीफन श्वार्जमैन ने की थी, जो कि फिलहाल कंपनी के सीईओ भी हैं। इस कंपनी ने अब तक कई क्षेत्रों में निवेश किए हैं। इनमें रियल एस्टेट से लेकर कंपनी एसेट्स तक शामिल हैं। कंपनी के पास थॉमसन रॉयर्स से लेकर भारतीय आईटी सर्विस कंपनी एम्फेसिस में भी अहम निवेश हैं।

कंपनी के सीईओ स्टीफन श्वार्जमैन अमेरिका की विपक्षी पार्टी रिपब्लिकन का भी हिस्सा हैं। वे ब्लैकस्टोन शुरू करने से पहले लेहमैन ब्रदर्स का भी हिस्सा रहे थे। वे रिपब्लिकन पार्टी के सत्ता में रहने के दौरान सरकार में पद भी संभाल चुके हैं।

मोदी के साथ बैठक अहम क्यों?
डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति रहने के दौरान श्वार्जमैन ने कुछ समय के लिए अमेरिकी सरकार के कूटनीतिक फोरम की अध्यक्षता भी संभाली। वे ट्रंप के अलावा रिपब्लिक नेता और टेक्सास से सांसद टेड क्रूज के भी काफी करीबी हैं। मोदी की श्वार्जमैन के साथ बैठक को रिपब्लिक नेताओं के साथ करीबी बनाए रखने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा सकता है।
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