म्यांमार के ग्रामीण और कई शहरी इलाकों में सैनिक शासन की तरफ से प्रायोजित हिंसा तेजी से फैल रही है। खबर है कि सैनिक शासन विरोधी हथियारबंद गुटों के हमलों के जवाब में सेना ने कई जगहों पर बस्तियों में आग लगा दी। इसके अलावा जिन इलाकों को सैनिक शासन ने ‘ड्राइ ज़ोन’ घोषित किया है, वहां हवाई बमबारी भी की गई है। ऐसे ज्यादातर इलाके देश के दक्षिण-पूर्वी भाग में हैं।
समझा जाता है कि अप्रैल के बाद से ही सैनिक शासकों ने तथाकथित नए पब्लिक सिक्युरिटी सिस्टम पर अमल शुरू कर दिया। इसके तहत बनाए गए गुटों को कई तरह के काम दिए गए हैं। उनमें स्थानीय खुफिया जानकारी इकट्ठी करना, सुरक्षा बलों की कार्रवाइयों में मददगार बनना, और धमकियों और हिंसा के जरिए स्थानीय जन समूहों को आतंकित करना शामिल है।
ये पहला मौका नहीं है, जब म्यांमार के सैनिक शासकों ने इस तरह के तरीके अपनाए हों। ऐसा ही तरीका साल 2000 के आसपास भी तत्कालीन सैनिक शासन ने अपनाया था। तब ऐसे गिरोह बनाए गए थे, जिन्होंने सैनिक शासन विरोधी समूहों पर भयंकर कहर ढाया। इसके पहले 1960 के दशक में भी म्यांमार की सेना ने देश के कुछ हिस्सों में ‘पीपुल्स मिलिशिया सिस्टम’ लागू किया था।