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अब पूरे के पूरे गांव जला देने पर उतर आई है म्यांमार की सेना

Thu, 17 Jun 2021 04:16 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, यंगून

सार

मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि म्यांमार की सेना ने 2017 में सैकड़ों गांवों में आग लगा दी थी। उस समय वह रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ मुहिम चला रही थी। ऐसे ही दमन के कारण सात लाख से ज्यादा रोहिंग्या मुसलमान पलायन करके बांग्लादेश चले गए...
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म्यामांर में मचा है बवाल - फोटो : पीटीआई (फाइल)
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विस्तार
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म्यांमार की सेना अब उन गांवों को जला रही है, जहां के लोग सैनिक शासन का विरोध करने में आगे रहे हैं। बुधवार को उन्होंने एक गांव में आग लगा दी, जिसमें दो बुजुर्ग जल मरे। ये खबर म्यांमार के टीवी चैनल एमआरटीवी ने दी। उस आधार पर पश्चिमी देशों के मीडिया में भी ये खबर चर्चित हुई। एमआरटीवी की खबर के मुताबिक मागवे क्षेत्र में स्थित किन मा गांव में आग लगाई गई। इस गांव की आबादी 800 है। लेकिन सेना ने कहा है कि आगजनी ‘आतंकवादियों’ ने की, जिस बारे में सेना को बदनाम करने के लिए जानबूझ कर गलत खबरें दी गई हैं।

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म्यांमार में सेना ने पिछले एक फरवरी को तख्ता पलट दिया था। उसने नव निर्वाचित सरकार के सत्ता संभालने से कुछ ही घंटों के पहले ये कदम उठाया। सेना ने आरोप लगाया कि पिछले चुनाव में धांधली हुई। लेकिन तख्ता पलट होते ही देश में बड़े पैमाने पर नागरिकों का विरोध भड़क उठा। ये अभी भी शांत नहीं हुआ है। आरोप है कि फरवरी से म्यांमार की सेना सैनिक शासन विरोधी आंदोलनकारियों के साथ क्रूरता से पेश आई है।

इस बीच म्यांमार के बागी गुटों के साथ भी सेना का टकराव बढ़ गया है। दोनों तरफ से कई जगहों पर गोलीबारी हुई है। गौरतलब है कि म्यांमार के कई इलाकों में दशकों से अलगाववादी सशस्त्र संघर्ष चलता रहा है। ताजा खबर के बाद ये इल्जाम लगा है कि बागियों और सैनिक शासन विरोधी आंदोलनकारियों को दंडित करने के लिए उनके प्रभाव इलाकों वाले गांवों में सेना सामूहिक सजा दे रही है। इसी सिलसिले में गांवों में आगजनी की गई है।
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किन मा में हुई घटना से सेना ने इनकार नहीं किया है। उसने सिर्फ यह कहा है कि आग उसने नहीं लगाई। उस गांव से आई तस्वीरों में देखा गया कि पूरा इलाके घने धुएं में डूब गया था। चारों तरफ जली हुई लकड़ियां, ईंट, रसोई घर के सामान आदि बिखरे हुए थे। पशुओं की लाशें भी जहां तहां बिखरी हुई थीँ। गांव में सिर्फ कुछ पेड़ खड़े नजर आए। म्यांमार स्थित ब्रिटिश दूतावास ने इन तस्वीरों को ट्विट किया। इस ट्विट के मुताबिक ब्रिटिश राजदूत दान चुग ने कहा है- ‘मागवे में सेना द्वारा पूरे गांव को जला देने की खबर मिली है, जिसमें बुजुर्गों की मौत हो गई। ये घटना फिर दिखाती है कि सेना भयानक अपराध करने में जुटी हुई है और म्यांमार की जनता के लिए उसके मन में कोई सम्मान नहीं है।’

मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि म्यांमार की सेना ने 2017 में सैकड़ों गांवों में आग लगा दी थी। उस समय वह रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ मुहिम चला रही थी। ऐसे ही दमन के कारण सात लाख से ज्यादा रोहिंग्या मुसलमान पलायन करके बांग्लादेश चले गए। इससे साफ है कि जनता के दमन के लिए आगजनी म्यांमार की सेना का पुराना तरीका है। अब वह ये तरीका देश के बहुसंख्यक समुदाय वाले गांवों पर भी आजमा रही है। गौरतलब है कि 2017 में भी सेना ने रोंहिग्या मुसलमानों के गांवों को जलाने के आरोप का खंडन किया था।

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