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Myanmar: पचास साल में पहली बार चार कैदियों को दी गई फांसी, मानवाधिकार संगठनों ने जताया विरोध

Mon, 25 Jul 2022 04:23 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, यंगून

सार

म्यांमार की सैन्य सरकार ने इसे लेकर एक बयान भी जारी किया और कहा कि चारों कैदियों को फांसी दिए जाने की खबर सही है। हालांकि जिस जेल में कैदियों को रखा गया था, उसने और जेल विभाग ने इस पर टिप्पणी करने से मना कर दिया...
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Democracy activist Kyaw Min Yu and former lawmaker Maung Kyaw - फोटो : Agency
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विस्तार
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म्यांमार की सरकार के खिलाफ असंतोष और गुस्से की एक नई लहर पैदा हो रही है। खासकर सोमवार को चार राजनीतिक बंदियों को फांसी देने की घटना ने पूरे देश में हलचल सी मचा दी है। पचास सालों में पहली बार ऐसा हुआ है कि म्यांमार में किसी कैदी को फांसी दी गई है। वहां की सरकार ने ये ऐलान किया है कि उसने नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (एनएलडी) के पूर्व सांसद, लोकतंत्र समर्थक एक कार्यकर्ता और दो अन्य लोगों को फांसी दे दी। ये चारों राजनीतिक कैदी पिछले साल सत्ता पर सेना के कब्जे के बाद हुई हिंसा के मामले में दोषी करार दिए गए थे।

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म्यांमार के सरकारी अखबार मिरर डेली में इस फांसी को लेकर जानकारी दी गई है। इन कैदियों को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद दुनिया के कई मानवाधिकार संगठनों और संयुक्त राष्ट्र से जुड़े विशेषज्ञों ने भी इन्हें रिहा करने और इनके प्रति सहानुभूति के साथ विचार करने का अनुरोध किया था। साथ ही दक्षिण पूर्वी एशियाई राष्ट्रों के संगठन (आसियान) के मौजूदा अध्यक्ष कंबोडिया समेत दुनियाभर के कई देशों और हस्तियों ने इन चारों राजनीतिक कैदियों के प्रति दया दिखाने को कहा था। लेकिन इन तमाम दबावों और आग्रहों को दरकिनार कर चारों कैदियों को फांसी दे दी गई।

 

अखबार के मुताबिक आतंकवादी गतिविधियों के तहत पिछले साल सरकार विरोधी गतिविधियों के दौरान हत्या करने के अमानवीय तरीके से इसे अंजाम देने में सहयोग करने और हिंसा फैलाने के लिए उकसाने के आरोप में चारों को कानूनी प्रक्रियाओं के तहत फांसी की सजा दी गई।
 

 

म्यांमार की सैन्य सरकार ने इसे लेकर एक बयान भी जारी किया और कहा कि चारों कैदियों को फांसी दिए जाने की खबर सही है। हालांकि जिस जेल में कैदियों को रखा गया था, उसने और जेल विभाग ने इस पर टिप्पणी करने से मना कर दिया। फरवरी 2021 में सेना की ओर से सत्ता पर कब्जा करने के बाद म्यांमार के बाहर राष्ट्रीय एकता सरकार बनाई गई थी। इस सरकार में मानवाधिकार मंत्री आंग मायो मिन ने फांसी की घटना की कड़ी निंदा करते हुए इन आरोपों को खारिज किया कि ये चारों लोग हिंसा में शामिल थे। उनका कहना है कि म्यांमार के सैनिक शासक इस फांसी की कार्रवाई से लोगों के भीतर दहशत पैदा करना चाहते हैं।

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जिन लोगों को फांसी दी गई है, उनमें अपदस्थ नेता आंग सान सू ची की सरकार के पूर्व सांसद फ्यो जेया थो भी शामिल थे, जिन्हें माउंग क्वान के नाम से जाना जाता था। उन्हें विस्फोट, बमबारी और आतंकवाद को आर्थिक मदद देने जैसे मामलों में जनवरी में दोषी ठहराया गया था। क्वान की पत्नी थाजिन न्युंत ओंग को अभी तक उनके पति को फांसी देने की कोई सूचना नहीं दी गई है। वो परेशान हैं और इस खबर की पुष्टि करने की कोशिशों में लगी हैं। 41 वर्षीय क्वान को पिछले साल नवंबर में गिरफ्तार किया गया था। वह 2007 में जनरेशन वेव राजनीतिक आंदोलन का सदस्य बनने से पहले हिप-हॉप संगीतकार भी रह चुके थे। उन्हें 2008 में भी एक मामले में जेल भेजा गया था।
 

 

क्वान के अलावा आतंकवाद निरोधी कानून के उल्लंघन के मामले में लोकतंत्र समर्थक 53 वर्षीय क्वाव मिन यू को भी फांसी दी गई। क्वाव मिन यू को जिम्मी के नाम से भी जाना जाता था। उन्हें पिछले साल अक्तूबर में गिरफ्तार किया गया था। इनके अलावा, सेना की मुखबिर होने के संदेह में मार्च 2021 में एक महिला का उत्पीड़न और उसकी हत्या करने के मामले में दोषी ठहराए गए ह्ला म्यो ओंग और ओंग थुरा जो को भी फांसी दी गई।

 

एशिया में ह्यूमन राइट्स वॉच की कार्यवाहक निदेशक एलेन पियर्सन और मानवाधिकार संबंधी मामलों के लिए संयुक्त राष्ट्र की ओर से नियुक्त स्वतंत्र विशेषज्ञ थॉमस एंड्रयू ने इस मामले की कड़ी निंदा की है और इसे अमानवीय करार दिया है। इस घटना के खिलाफ इन नेताओं ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आवाज़ उठाने की अपील भी की है।

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