1. म्यांमार में भूकंपों का खतरा कितना?
म्यांमार दो टेक्टॉनिक प्लेट्स के बीच में आता है। इसके चलते म्यांमार भूकंप के झटकों का सामना करने वाले सबसे सक्रिय क्षेत्रों में से है। हालांकि, सगैंग क्षेत्र में बड़े और घातक भूकंप बाकी इलाकों के मुकाबले कम आते हैं।
- यूनिवर्सिटी कॉलेज, लंदन की प्रोफेसर और भूकंप विशेषज्ञ जोआना फौरे वॉकर के मुताबिक, इंडिया प्लेट और यूरेशियाई प्लेट की सीमा उत्तर से दक्षिण तक है और यह म्यांमार को बीच से काटती हुई गुजरती हैं।
- गौरतलब है कि इंडिया प्लेट धीरे-धीरे अपने ऊपर स्थित यूरेशियाई प्लेट के टक्कर मारते हुए पूर्वोत्तर की तरफ बढ़ने की कोशिश कर रही है, जबकि यूरेशियाई प्लेट के आगे बढ़ने की रफ्तार काफी धीमी है।
म्यांमार में भूकंप के बाद तबाही का मंजर
- फोटो : पीटीआई
2. म्यांमार में इस बार आए भूकंप ने इतनी तबाही क्यों मचाई?
सगैंग में बीते कुछ समय में भीषण भूकंप के झटके आए हैं। 2012 के आखिर में आए 6.8 तीव्रता के एक भूकंप ने जबरदस्त तबाही मचाई थी और इससे 26 लोगों की जान चली गई थी। हालांकि, शुक्रवार का भूकंप पिछले करीब 75 साल में म्यांमार के मुख्य क्षेत्र पर आने वाला सबसे बड़ा भूकंप हो सकता है।
ब्रिटिश जियोलॉजिकल सर्वे के ऑनररी रिसर्च फेलो रॉजर मुसोन के मुताबिक, कई बार भूकंप का असर इस बात पर निर्भर करता है कि इसका केंद्र जमीन के कितना नीचे था। यह जमीन के जितना नीचे होता है, उतना ही भूमि के अंदर मौजूद पदार्थ शॉकवेव यानी झटकों के असर को सोख लेते हैं और प्रभाव कम कर देते हैं।
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हालांकि, म्यांमार में भूकंप का केंद्र जमीन से सिर्फ 10 किलोमीटर नीचे था, जो कि गहराई के लिहाज से काफी कम है। इसलिए सगैंग में भूकंप काफी तेज महसूस हुआ और इसका असर पड़ोसी देश थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक तक में देखा गया, जहां इमारतें झटकों से पूरी तरह कांप गईं। मुसोन ने बताया कि भूकंप के झटके और इसकी लहरें हमेशा भूकंप के केंद्र पर निर्भर नहीं होतीं, बल्कि क्षेत्र किस प्लेट पर स्थित है इसका भी असर होता है।
म्यांमार में भूकंप के बाद तबाही का मंजर
- फोटो : पीटीआई
उन्होंने कहा कि म्यांमार के पश्चिमी क्षेत्रों ने ज्यादा भूकंप देखे हैं, जबकि केंद्र में स्थित सगैंग में इस तरह का आखिरी भूकंप 1956 में आया था और अब उम्मीद कम ही है कि म्यांमार में इस तरह के झटकों को झेलने लायक इमारतें बनी होंगी।