corona vaccine - सांकेतिक तस्वीर
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ब्रिटेन में फाइजर बायोएनटेक की वैक्सीन को मंजूरी मिल गई है।अब मॉडर्ना और ऑक्सफोर्ड एस्ट्राजेनेका को कोरोना वैक्सीन का इंतजार है। दावा है कि एम-आरएनए (मैसेंजर) तकनीक पर आधारित फाइजर और मोडर्ना की वैक्सीन से शरीर भविष्य में कोरोना से लड़ने में सक्षम हो जाएगा।
फिलाडेल्फिया चिल्ड्रन हॉस्पिटल के वैक्सीन वैज्ञानिक डॉ. पॉल ऑफिट के मुताबिक, टीका लगने के बाद के लक्षण आने का मतलब है कि टीका असर कर रहा है जैसी उम्मीद की गई थी।
हल्की तकनीक महसूस होने पर घबराने की जरूरत नहीं होती है क्योंकि कुछ समय तक आप डॉक्टरी निगरानी में रहते हैं। शरीर की हाल की रोग प्रतिरोधक क्षमता टीका लगने के बाद अपनी प्रतिक्रिया कुछ इसी तरह से देता है जो संबंधित व्यक्ति के लिए अच्छा संकेत है। संभव है कि यह वायरस के हमले से सुरक्षित दिशा में आ रहा है।
24 से 48 घंटे तक रह सकती है तकलीफ
अमेरिका के संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉक्टर एंथनी फौची का कहना है कि जब किसी को वैक्सीन लगती है तो उसे पूर्ण सामान्य बुखार आता है। बच्चों में कोई भी टीका लगने पर यह तकलीफ आम है। कुछ लोग के वहां में था दर्द ठंड महसूस होना और कुछ को बुखार आ सकता है। यह तकलीफ 24 से 48 घंटे तक रह सकती है इस सामान्य लक्षणों के अलावा अन्य किसी व्यक्ति को दूसरी तरह की तकलीफ होती है तो सतर्क रहने की जरूरत है। कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
टीका एमआरएनए आधारित
डॉ. पॉल ऑफिट बताते हैं कि एमआरएनए आधारित वैक्सीन जब शरीर में लगती है तो वायरस के खिलाफ मेमोरी बन जाती है क्योंकि इसे बनाने बनाने में भी वायरस के सूक्ष्म कणों का प्रयोग होता है। वह बताते हैं कि शरीर जब भी कोरोना की चपेट में आएगा, खासकर वायरस के स्पाइक प्रोटीन के तो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता स्वत: सक्रिय हो जाएगी। इम्यूनिटी स्पाइक प्रोटीन का फॉरेन ऑब्जेक्ट माइनस के खिलाफ काम करना शुरू कर देगा, नतीजा यह होगा कि वायरस का कोई असर नहीं होगा।