इन 10 में से आठ विज्ञापनों में पीएम मोदी द्वारा ब्लूमबर्ग फोरम में दिए गए वक्तव्य, अर्थव्यवस्था, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा, आदि विषयों पर चर्चा के दौरान बनाए वीडियो व तस्वीरों के फेसबुक पोस्ट हैं। बाकी में फोरम के उद्घाटन की पोस्ट हैं।
25 से 34 वर्ष टारगेट ग्रुप
फेसबुक ने इन विज्ञापनों को सबसे ज्यादा 57 प्रतिशत दफा 24 से 34 वर्ष के युवा लड़कों को परोसा गया। इसी उम्र की लड़कियों को यह केवल नौ प्रतिशत गया, जो विज्ञापनों भेजने में बरते गए लैंगिक भेदभाव को दर्शाता है।
यह भी माना गया है कि नरेंद्र मोदी की इस आयु वर्ग में लोकप्रियता का सहारा लेकर माइक भी खुद को प्रोजेक्ट कर पाएंगे। इसी आयु वर्ग से कई युवा अमेरिका में कॅरियर विकल्प या ऑनसाइट अवसर तलाशते हैं।
दूसरे नंबर पर रहे न्यूज एप केे अलावा बाकी प्रमुख फेसबुक विज्ञापनदाता राजनीतिक दल रहे। इनमें शिवसेना और तृणमूल कांग्रेस के ‘दीदी के बोलो’ व ‘आमार गोर्बो ममता’ अभियान के विज्ञापन प्रशांत किशोर की बनाई इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी ने दिए।
चुनाव में विपक्षी दल की छवि सोशल मीडिया पर बिगाड़ने में भी काफी पैसा खर्च किया गया, एनसीपी-कांग्रेस की आलोचना करते पेज ‘अघाड़ी बिघाड़ी’ ने सात लाख रुपये से ज्यादा खुद को प्रमोट करने में लगा दिए।
| दल/संस्था |
अभियान खर्च |
कुल विज्ञापन |
| शिवसेना |
19.83 लाख |
117 |
| झारखंड कांग्रेस |
14.13 लाख |
372 |
| दीदी के बोलो |
13.09 लाख |
320 |
| फिर एक बार, ईमानदार सरकार (हरियाणा भाजपा) |
11.90 लाख |
688 |
| दिस्तोए फरक, शिवशाही परत (महाराष्ट्र भाजपा) |
10.83 लाख |
99 |
| आमार गोर्बो ममता |
9.78 लाख |
167 |
| आरके सिन्हा (भाजपा राज्यसभा सांसद) |
9.47 लाख |
419 |
| कांग्रेस महाराष्ट्र |
8 लाख |
13 |
| अघाड़ी बिघाड़ी |
7.36 लाख |
364 |
| भाजपा महाराष्ट्र |
7.09 लाख |
80 |