जॉर्ज माइकल की मौत के बाद यह पहला मौका है कि जॉर्ज का जन्मदिन आया है। इससे पहले जन्म से लेकर पिछले साल तक हर साल जॉर्ज ने जन्मदिन की बधाई ली, सुनी, पढ़ी होगी लेकिन यह पहली ही बार है कि जन्मदिन की बधाई बोलने वाले तो हैं, सुनने वाला नहीं है। क्या संयोग है कि 25 जून को पैदा हुए जॉर्ज माइकल की मौत 25 ही तारीख को हुई, वह भी बीते साल क्रिसमस पर।
एक और संयोग है कि जॉर्ज का ही अपना गीत था, जिसका शीर्षक था, लास्ट क्रिसमस और लास्ट ईयर का क्रिसमस जॉर्ज के जीवन का लास्ट क्रिसमस ही साबित हुआ। इससे भी बड़ा एक और संयोग है कि 25 जून को हर साल जॉर्ज के जन्मदिन की खुशियां मनती थीं लेकिन इसी दिन 2009 में माइकल जैक्सन की मौत हो गई। तो बीते साल से तो यह दिन
जॉर्ज माइकल के जन्मदिन और माइकल जैक्सन की पुण्यतिथि के रूप में ही दर्ज होता रहा है, और इस साल इसमें नया अध्याय जुड़ गया कि जीवित जॉर्ज के जन्मदिनों की लंबी श्रृंखला के बाद अब दिवंगज जॉर्ज का यह पहला जन्मदिन है।
माइकल जैक्सन और जॉर्ज माइकल में केवल नाम, कालखंड और जन्म-मृत्यु की तारीख का ही साम्य है, लेकिन इसके इतर इन दोनों में व्यक्तित्व के तल पर, शैली के तल पर और छवि के तल पर कोई साम्य नहीं है। दोनों सर्वथा विपरीत रहे। जिस कालखंड में जैक्सन परवान चढ़े, उसी कालखंड में जॉर्ज ने भी सितारा बन जाने का स्वाद चखा। जैक्सन को किंग ऑफ पॉप का तमगा दिया जाता है, जॉर्ज को मैं किंग ऑफ पॉप एंड फंक का दर्जा देता हूं लेकिन हैरत है यह दर्जा वैश्विक क्यों नहीं है।
यदि हम जैक्सन के चमत्कृत कर देने वाले परफार्मेंस की लाजवाब शैली के कायल हैं तो हम जॉर्ज की मदहोश कर देने वाली आवाज और उसमें कूट कूटकर भरी स्टाइल, अदा, गहराई, ऊंचाई, मिठास, तीखापन, खट्टापन, फीकापन सभी के मुरीद क्यों नहीं हैं। क्यों जॉर्ज माइकल की गायकी को आज भी अंडरएस्टीमेटेड समझा जाता है। जहां तक केवल और केवल वोकल की बात है, गायन विधा की बात है, जॉर्ज माइकल निसंदेह सर्वकालिक महानतम और श्रेष्ठतम साबित होंगे क्योंकि उनके जैसा सधा हुआ गायन आज तक किसी का नहीं रहा। वे सही मायनों में बेमिसाल हैं।
क्या लो-पिच और क्या हाई-पिच, क्या डिस्को और क्या फंक, क्या बैलेड और क्या पॉप, जॉर्ज एक पक्के, मंजे हुए हरफनमौला की तरह गीत में उतरते और उसे खरा सोना बनाकर छोड़ देते जो मुद्रित ध्वनि में रूपांतरित होकर सदा के लिए दर्ज हो गया है। इस हैंडसम और डेशिंग पुरुष में हैंडसमनेस केवल व्यक्तित्व में ही नहीं, आत्मा में भी कूट कूटकर इस कदर भरी थी कि वह गायकी में फूट फूटकर निकलती थी। जॉर्ज की सधी हुई, बेदाग और डेम परफेक्ट गायकी सुनकर आश्चर्य होना लाजिमी है कि आखिर इस व्यक्ति ने इस गीत को इतना बेहतरीन कैसे गा लिया होगा।