राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और मालदीव के राष्ट्रपति मुइज्जू (फाइल)
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75वें गणतंत्र दिवस के मौके पर मालदीव ने भारत को शुभकामना संदेश भेजा। यह इस मायने में अहम है क्योंकि बीते कुछ हफ्ते से भारत और मालदीव के रिश्ते पहले की तरह सामान्य नहीं हैं। 26 जनवरी को मालदीव की तरफ से जारी बयान में सदियों की दोस्ती, आपसी सम्मान और रिश्तेदारी की गहरी भावना का जिक्र किया गया। राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने मालदीव की सरकार और जनता की ओर से 'भारत सरकार और जनता का' अभिवादन किया। उन्होंने कहा कि भारत और मालदीव के संबंधों की जान सदियों पुरानी दोस्ती है। उन्होंने कहा कि आपसी सम्मान और रिश्तेदारी की गहरी भावना दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत बनाने का काम करती है।
मुइज्जू के कार्यालय की तरफ से जारी बयान के मुताबिक राष्ट्रपति ने भारतीय समकक्ष द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री मोदी को अलग-अलग बधाई संदेश भेजे। उन्होंने 75वें गणतंत्र दिवस की और शुभकामनाएं भेजीं। उनके अलावा विदेश मंत्री मूसा जमीर और दो पूर्व राष्ट्रपतियों, मोहम्मद नशीद और इब्राहिम मोहम्मद सोलिह ने भी अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भारत को शुभकामनाएं दीं। बता दें कि चीन के साथ करीबी की कोशिशों में जुटे मालदीव के नए राष्ट्रपति मुइज्जू के मंत्रिमंडल में शामिल बड़बोले मंत्रियों ने भारत के साथ रिश्ते खराब करने में अहम भूमिका निभाई।
दरअसल, मालदीव और भारत के रिश्तों में राजनीति की अहम भूमिका है। विदेश मंत्रालय राष्ट्रीय हित और नीतियों के मुताबिक दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में संतुलन बनाने के प्रयास करता है। हालांकि, मालदीव में मुइज्जू के राष्ट्रपति बनने के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तल्खी आ गई है। सोशल मीडिया पर बायकॉट मालदीव ट्रेंड होना कई दिनों तर चर्चित रहा था है। रिश्तों की तल्खी के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम भी चर्चा में रहा। पीएम मोदी के लक्षद्वीप दौरे के बाद मालदीव की मंत्री मरियम शिउना (Mariyam Shiuna) की विवादित टिप्पणी से पीएम मोदी का नाम चर्चा में आया। मालदीव के नए राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू का भारत के प्रति नजरिया भी चुनौतीपूर्ण है। विवाद बढ़ने पर मालदीव ने तीनों मंत्रियों पर सख्ती दिखाई, लेकिन डैमेज कंट्रोल की इस कवायद के बावजूद दोनों देशों के रिश्तों में आई कड़वाहट खत्म नहीं हुई है।