9. सवाल: इस पूरे घटनाक्रम के दौरान मालदीव के राष्ट्रपति की चीन यात्रा चल रही है। क्या इस घटनाक्रम के परिप्रेक्ष्य में भी कुछ देखा जा रहा है मालदीव में।
जवाब: देखिए अभी जो राष्ट्रपति के चुनाव हुए हैं वह तब तक किसी बड़े फैसले लेने की स्थिति में नहीं है जब तक की पार्लियामेंट के चुनाव ना हो जाए। अगले तीन महीने में मालदीव में पार्लियामेंट के भी चुनाव होने हैं। जब यह चुनाव हो जाएंगे उसके बाद तय होगा कि राष्ट्रपति को कितनी ताकत मिलती है। इसलिए राष्ट्रपति मुइज्जु की चीन यात्रा में किसी भी तरीके की आधिकारिक तौर पर ना तो कोई डील होने वाली है और ना ही कोई फैसले होने वाले हैं। रही बात इस घटनाक्रम के संदर्भ में किसी दूसरे देश के हस्तक्षेप की बात करने की तो मालदीव की जनता ऐसा कभी नहीं होने देगी कि वह किसी दूसरे देश के हाथ में खेले।
10. सवाल: तो आपको लगता है चीन से वापस आने के बाद राष्ट्रपति मौजूद इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाएंगे। ताकि भारत जैसे मजबूत और मददगार पड़ोसी देश का साथ मालदीव को मिलता रहे।
जवाब: निश्चित तौर पर उनको ऐसा ही करना चाहिए। क्योंकि बीते कई दशकों में मालदीव को जब-जब जरूरत हुई है तो भारत ही हमेशा उसके साथ खड़ा हुआ है। कोविड जैसी महामारी में भारत ने मालदीव की बहुत मदद की। हमारे देश में आज भी बहुत कुछ भारत से ही आयात होता है। इसलिए भारत से रिश्ते बिगाड़कर मालदीव को कुछ हासिल नहीं हो सकता। अभी महज दो महीने पुरानी सरकार है उनकी। मैं उम्मीद करता हूं कि आने वाले समय में भारत और मालदीव के रिश्ते हमेशा की तरह मजबूत, सच्चे और अच्छे ही रहेंगे।