मलयेशिया के प्रधानमंत्री इस्माइल साबरी याकूब
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मलयेशिया के सुल्तान ने शुक्रवार को इस्माइल साबरी याकूब को देश का नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया है। इसी के साथ ही देश में सबसे लंबे समय तक सत्ता में रहे राजनीतिक दल की फिर से वापसी हो गई है। नए पीएम उस यूएनएमओ पार्टी के हैं जिसे करोड़ों रुपये के वित्तीय प्रकरण के चलते 2018 में सत्ता गंवानी पड़ी। यह पार्टी 1957 में ब्रिटेन से आजादी मिलने के बाद से 2018 तक सत्ता में रही।
इस्माइल साबरी याकूब की पार्टी ने 2018 में वित्तीय घोटाले के बाद गंवाई थी सत्ता
सुल्तान अब्दुल्ला अहमद शाह ने कहा कि 61 वर्षीय इस्माइल को 114 सांसदों का बहुमत हासिल है और वे शनिवार को मलयेशिया के नौवें प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। इससे पहले इस्माइल मुहिउद्दीन यासीन की सरकार में उप प्रधानमंत्री थे। यासीन ने गठबंधन में अंतर्कलह के चलते बहुमत खोने के बाद प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।
वह 18 महीने से कम समय तक देश के प्रधानमंत्री रहे। मुहिउद्दीन के गठबंधन को जारी रखने के लिए इस्माइल की नियुक्ति जरूरी थी। इस्माइल के प्रधानमंत्री नियुक्त होने के बाद देश में यूनाइटेड मलयज नेशनल ऑर्गनाइजेशन (यूएमएनओ) फिर से सत्ता में लौट आया है। मलयेशिया में सुल्तान की भूमिका काफी औपचारिक होती है लेकिन वह उस शख्स को नियुक्त करता है जिसे वह मानता है कि संसद में उसे पीएम के रूप में बहुमत का समर्थन हासिल है।
जनता में आक्रोश व सियासी अस्थिरता पर भी विचार
नए पीएम की नियुक्त को लेकर राष्ट्रीय महल में शाही बैठक भी हुई है। बैठक में राजा की पसंद से जनता में आक्रोश पैदा होने और राजनीतिक अस्थिरता पैदा होने की आशंका पर भी विचार किया गया। दरअसल मलयेशिया में करीब 64 साल तक राज करने वाली यूएमएनओ पार्टी 2018 में अरबों डॉलर के वित्तीय घोटाले के बाद सत्ता से बाहर हुई थी। इस कारण लोगों में पार्टी के प्रति गुस्सा है।
विरोध में ऑनलाइन याचिका
इस्माइल की उम्मीदवारी का विरोध करने वाले मलयेशिया के लोगों ने एक ऑनलाइन याचिका शुरू की है। इसमें अब तक 3,40,000 से अधिक हस्ताक्षर किए गए हैं। कई लोगों का मानना है कि इस्माइल की नियुक्ति यथास्थिति को बरकरार रखेगी और देश में किसी भी तरह के सुधार की गुंजाइश नहीं रहेगी। जबकि देश कोरोना महामारी के भीषण संकट से जूझ रहा है।