तोक्यो ओलिंपिक में एक खास बात एलजीबीटी (समलैंगिक-बाइ सेक्सुअल- ट्रांसजेंडर) समुदायों को खास पहचान देने के लिए की गई पहल है। इन खेलों का एक स्लोगन- यूनिटी इन डायवर्सिटी (विभिन्नता में एकता) रखा गया है। अब जापान के एलजीबीटी समुदाय ने मांग की है कि इस आयोजन का उपयोग विभिन्नता को प्रोत्साहित करने के लिए पूरे जोरशोर से होना चाहिए। गौरतलब है कि जापान एक रूढ़िवादी देश है, जहां समलैंगिक संबंधो को आज भी खराब नजर से देखा जाता है।
जापानी एथलीट फुमिनो सुगियामा ने महिला एथलीट के रूप में जापान का प्रतिनिधित्व किया था। लेकिन एक दशक पहले उन्होंने खुद को पुरुष घोषित किया। पिछले हफ्ते उन्हें जापान ओलिपिंक समिति का सदस्य बनाया गया। इस तरह वे समिति का सदस्य बनने वाले पहले ट्रांसजेंडर व्यक्ति बने। वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम को दिए एक इंटरव्यू में सुगियामा ने कहा कि प्रसंशकों और प्रायोजकों की नकारात्मक प्रतिक्रिया के अंदेशे से एलजीबीटी एथलीट कभी खुल कर अपनी यौन पहचान के बारे में बात नहीं करते। इसलिए अब ऐसा माहौल बनाने की जरूरत है, जिससे ऐसे एथलीट मनोवैज्ञानिक सुरक्षा महसूस कर सकें।
सुगियामा अभी 39 साल के हैं। 25 वर्ष की उम्र में खेल से रिटायर होने के बाद उन्होंने मर्द पहचान अपनाने का फैसला किया था। लेकिन अब जापान में हालात पहले से बेहतर हैँ। अब अधिक संख्या में एलजीबीटी एथलीट अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं। इनमें महिला फुटबॉल खिलाड़ी शिहो शिमोयामादा भी हैं। 2019 में उन्होंने एलान किया था कि वे समलैंगिक हैं। शिमोयामादा का भी कहना है कि अगर एलजीबीटी अधिकारों का सम्मान करने वाला एक कानून बने या वैसा सिस्टम बनाया जाए, तो समलैंगिक खिलाड़ी खुद को मनोवैज्ञानिक रूप से ज्यादा सुरक्षित महसूस करेंगे।
शिमोयामादा ने वेबसाइट निक्कई एशिया से कहा- ‘जब तक मैंने एलान नहीं किया था, मैं अपनी साथी खिलाड़ियों से सहजता से बात नहीं कर पाती थी। तब मुझे महसूस नहीं होता था कि जो मैं हूं, उसी रूप में टीम में हूं। तब मैं टीम के प्रति अपनी पूरी प्रतिबद्धता भी नहीं रख पाती थी।’ शिमोयामादा ने कहा कि खिलाड़ी प्रायोजकों और प्रशंसकों पर निर्भर रहते हैं। इसलिए उनके बीच बन सकने वाली नकारात्मक धारणा को लेकर वे भयभीत रहते हैं।
इसी महीने 31 वर्षीया महिला रग्बी खिलाड़ी ऐरी मुराकामी ने भी एलान किया कि वे समलैंगिक हैं। पिछले महीने फुटबॉल खिलाड़ी कुमी योकोयामा ने घोषणा की थी कि वे ट्रांसजेंडर पुरुष हैं। योकोयामा अमेरिका में प्रोफेशनल फुटबॉल खेलते हैं। अमेरिका में एलजीबीटी समुदायों के लिए स्थितियां अधिक अनुकूल हैं। जब योकोयामा ने एलान किया, तब अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने ट्विट कर उनके प्रति समर्थन जताया। बाइडन ने कहा- ‘मुझे आपके साहस पर गर्व है। आपकी वजह से आज दुनिया में अनगिनत बच्चे खुद को एक नई रोशनी में देख पा रहे हैं।’
जापानी एलजीबीटी खिलाड़ी चाहते हैं कि उनके देश में भी अमेरिका जैसा समर्थन दिखाया जाए। गैर सरकारी संगठन निजिरो डायवर्सिटी का कहना है कि ओलिंपिक खेलों की एलजीबीटी लोगों की पहचान स्थापित करने में खास भूमिका रही है। 2016 में जब ब्राजील के रियो द जनेरो में ओलिंपिक खेल हुए, तब पहली बार लगभग 50 ऐसे एथलीट उसमें शामिल हुए, जिन्होंने खुद को एलजीबीटी घोषित कर रखा था। इस समुदाय के लोगों को आशा है कि टोक्यो ओलंपिक के साथ ये कारवां और आगे बढ़ेगा।