कुवैत के अमीर शेख नवाफ अल अहमद अल सबा का शनिवार को 86 साल की उम्र में निधन हो गया। शेख नवाफ तीन साल पहले ही कुवैत के अमीर बने थे। अब युवराज शेख मेशाल अल अहमद अल सबा (83 वर्षीय) कुवैत के अगले अमीर होंगे। शेख मेशाल का 2021 से ही कुवैत का अमीर बनना तय था। शेख नवाफ जब बीमार थे तो उन्होंने खुद ही अपनी अधिकतर जिम्मेदारियां शेख मेशाल को सौंप दी थी। बता दें कि कुवैत के संविधान के तहत युवराज ही अगला अमीर बनते हैं।
शेख मेशाल के सामने हैं ये चुनौती
शेख मेशाल कुवैत की संसद में शपथ लेने के बाद आधिकारिक रूप से कुवैत के नए अमीर हो जाएंगे। शेख मेशाल संभवतः दुनिया के सबसे बुजुर्ग युवराज थे। शेख मेशाल संभवतः दुनिया के सबसे बुजुर्ग युवराज थे। सत्ता संभालने के बाद शेख मेशाल की सबसे बड़ी चुनौती सरकार और संसद के बीच के संबंधों का प्रबंधन करना होगा। दरअसल राजसी परिवार अल सबा के बीच की प्रतिद्वंदिता अकसर संसद में दिखाई देती है। बता दें कि कुवैत में जनता द्वारा चुनी हुई सरकार भी काम करती है और अक्सर राजशाही और लोकतंत्र के बीच खींचतान देखी जाती है।
शेख नवाफ के निधन पर 40 दिनों का शोक घोषित
वहीं शेख नवाफ के निधन पर कुवैत में 40 दिनों का शोक रहेगा, साथ ही तीन दिनों तक सभी सरकारी कार्यालय बंद रहेंगे। शेख नवाफ के निधन की वजह का खुलासा नहीं किया गया है। पिछले महीने स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शेख नवाफ के निधन पर दुनियाभर के नेताओं ने दुख जताया है। कुवैत को पश्चिम एशिया में अमेरिका का करीबी सहयोगी माना जाता है। कुवैत के पास दुनिया के छठे सबसे बड़े तेल रिजर्व हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने शेख नवाफ के निधन पर दुख जताते हुए उन्हें अमेरिका का सच्चा दोस्त बताया और कहा कि दोनों देश आगे भी अपने संबंधों को मजबूत बनाते रहेंगे।
साल 2020 में ही अमीर बने थे शेख नवाफ
शेख नवाफ की साल 2020 में ही अमीर पद पर ताजपोशी हुई थी। शेख नवाफ के भाई शेख सबा के निधन के बाद ही शेख नवाफ सत्ता पर काबिज हुए थे। शेख सबा ने एक दशक से भी ज्यादा समय तक कुवैत पर शासन किया था। कुवैत की सीमा सऊदी अरब और इराक से मिलती है। कुवैत पर साल 1990 में इराक ने कब्जा कर लिया था, जिससे पहले खाड़ी के युद्ध की शुरुआत हुई। साल 1991 में अमेरिका और अन्य सहयोगी देशों ने इराक को जंग में हराकर कुवैत को आजाद कराया। शेख नवाफ ने सत्ता संभालने के बाद से ही पड़ोसी देशों के साथ अपने रिश्ते सुधारने पर ध्यान दिया। अब कुवैत के सऊदी अरब के साथ रिश्ते काफी मजबूत हैं। इस दौरान उनके शासनकाल में कुवैत में आठ बार चुनी हुई सरकार बनी।