आगे की राह में टेरीजा मे के पास तीन रास्ते होंगे, जिनमें से पहला है हार्ड ब्रेक्जिट, दूसरा आम चुनाव और तीसरा है एक बार फिर जनमत संग्रह कराना।
हार्ड ब्रक्जिट- टेरीजा मे हार्ड ब्रेक्जिट को पेश कर सकती हैं, जिसे ब्रेक्जिट को मूल रूप से पेश करना भी कह सकते हैं। इसका मतलब ये हुआ कि जब 29 मार्च को ब्रिटेन यूरोपीय संघ से अलग हो जाएगा, तब इसके बाद एक नए समझौते पर चर्चा शुरू होगी, कि ब्रिटेन के अलग होने के बाद दोनों देशों में कैसा संबंध रहता है। वहीं अगर समयसीमा को 29 मार्च से बढ़ाना है तो सरकार को इसके लिए यूरोपीय संघ के पास नए सुझाव का आग्रह भेजना होगा। साथ ही सरकार को एग्जिट डे की परिभाषा में भी बदलाव करना होगा।
आम चुनाव- टेरीजा सरकार ब्रेक्जिट पर गतिरोध खत्म करने के लिए आम चुनाव कराने का फैसला भी कर सकती है। लेकिन समय से पहले चुनाव कराने के लिए पीएम टेरीजा को हाउस ऑफ कॉमन्स में दो-तिहाई सांसदों का समर्थन प्राप्त करना होगा।
एक बार फिर जनमत संग्रह- संसद से अनुमति लेने के बाद सरकार दोबारा से ब्रक्जिट पर जनमत संग्रह करवा सकती है। लेकिन इसमें एक परेशानी यह है कि इसके लिए कुछ जरूरी प्रक्रिया पूरी करनी होती है, जिसके लिए अब अधिक समय नहीं बचा है।