जनमत सर्वेक्षणों से जाहिर हुआ है कि जापान के लोगों में मौजूदा माहौल के बीच खेलों के आयोजन का विरोध बढ़ता जा रहा है। बीते रविवार को जारी को एक सर्वे रिपोर्ट में बताया गया कि 59 फीसदी लोग चाहते हैं कि इन खेलों को रद्द कर दिया जाए।
सिर्फ 39 फीसदी लोगों ने कहा कि इन खेलों का आयोजन होना चाहिए। पिछले हफ्ते जारी एक दूसरी सर्वे रिपोर्ट में कहा गया था कि 65 फीसदी लोग खेलों को अभी ना कराने के पक्ष में हैं। उनके बीच 37 प्रतिशत लोगों ने राय जताई थी कि खेलों को रद्द कर दिया जाना चाहिए, जबकि 28 प्रतिशत ने कहा था कि अभी इसे टाल देना चाहिए। इस बीच देश में खेलों को रद्द कराने के लिए एक याचिका अभियान चल रहा है, जिस पर बीते पांच दिनों में तीन लाख से ज्यादा लोग दस्तखत कर चुके हैं।
एक संसदीय समिति भी इस मामले में चर्चा कर रही है। उसके सामने एक सवाल पर प्रधानमंत्री सुगा ने कहा- 'मैंने कभी ओलिंपिक्स को सर्वोच्च प्राथमिकता नहीं दी। मेरी प्राथमिकता जापान के लोगों की जिंदगी और सेहत को बचाना है। हमें सबसे पहले वायरस को फैलने से रोकना होगा।'
सुगा ने कहा कि इन खेलों का क्या होता है, इस बारे में फैसला अंतरराष्ट्रीय ओलिंपिक समिति को करना है। सरकार की जिम्मेदारी सिर्फ यह है कि ये खेल सुरक्षित ढंग से हों। इस बीच पिछले हफ्ते जारी हुई सर्वे रिपोर्ट में बताया गया था कि सुगा की अप्रूवल रेटिंग (उनके काम से संतुष्ट लोगों की संख्या) गिर कर सिर्फ 40 फीसदी रह गई है।
अंतरराष्ट्रीय ओलिंपिक समिति के अधिकारी जॉन कोट्स ने कहा है कि जापानी लोगों की भावना गंभीर चिंता का विषय है। लेकिन उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसी कोई सूरत नजर नहीं आती, जिसमें खेल रद्द करने पड़ें। जबकि खिलाड़ी इन खेलों को लेकर ज्यादा उत्साहित नहीं दिखते। जापान की मशहूर टेनिस खिलाड़ी नाओमी ओसाका ने बीते रविवार को कहा था कि उन्होंने जीवन भर ओलिंपिक में खेलने का इंतजार किया, लेकिन टोक्यो में ये खेल हो या नहीं, इस बारे में सावधानी से विचार किया जाना चाहिए।