फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जापान की रक्षा रिपोर्ट में ‘ताइवान में स्थिरता’ का जिक्र, चीन से नए तनाव को न्योता

Wed, 14 Jul 2021 03:43 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तोक्यो

सार

रक्षा रिपोर्ट में कहा गया- ‘ताइवान के आसपास स्थिरता महत्वपूर्ण है। ऐसा सिर्फ जापान की सुरक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय  समुदाय की स्थिरता के लिए भी अहम है। जापान को अवश्य ही इस पर निकटता से नजर रखनी चाहिए, अगर जरूरी हो तो निगरानी बढ़ाई जानी चाहिए।’
विज्ञापन
जापान के प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा - फोटो : Agency (File Photo)
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

जापान और चीन के बीच पहले से जारी तनाव में एक नया पहलू जुड़ गया है। जापान ने पहली बार अपनी वार्षिक रक्षा रिपोर्ट में ‘ताइवान में स्थिरता’ का जिक्र किया है। गौरतलब है कि अमेरिका और चीन के बीच हाल में बढ़े तनाव का एक प्रमुख कारण ताइवान का मुद्दा भी है। ताइवान चीन का हिस्सा है। लेकिन वहां 1949 से उन ताकतों का शासन है, जो कम्युनिस्ट क्रांति के समय चीन से भाग कर वहां चले गए थे। हाल में अमेरिकी बयानों से ऐसा संकेत दिया गया है कि अमेरिका धीरे-धीरे ताइवान की आजादी को मान्यता देने की तरफ बढ़ रहा है। अब जापान की नीति में भी ऐसे बदलाव के संकेत हैं।

विज्ञापन


जापानी मीडिया में छपे विश्लेषणों कहा गया है कि जापान की रक्षा रिपोर्ट में ताइवान को लेकर इस्तेमाल की गई नई भाषा से चीन-जापान संबंधों में नया तनाव पैदा होना तय है। चीन ताइवान के बारे में हर टिप्पणी को लेकर बहुत संवेदनशील रहता है। पिछले मई में जब जापान की न्यूज एजेंसी क्योदो की एक टिप्पणी में ताइवान के बारे में एक टिप्पणी की गई, तो उस पर भी चीन सरकार ने प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। चीन ने उसे गैर-जिम्मेदाराना और गलत टिप्पणी कहा था। अब जबकि जापान सरकार की आधिकारिक रिपोर्ट में ताइवान का उल्लेख हुआ है, तो चीन का भड़कना तय माना जा रहा है।

रक्षा रिपोर्ट में कहा गया- ‘ताइवान के आसपास स्थिरता महत्वपूर्ण है। ऐसा सिर्फ जापान की सुरक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय  समुदाय की स्थिरता के लिए भी अहम है। जापान को अवश्य ही इस पर निकटता से नजर रखनी चाहिए, अगर जरूरी हो तो निगरानी बढ़ाई जानी चाहिए।’ गौरतलब है कि इसी महीने जापान के उप प्रधानमंत्री तारो असो ने कहा था कि अगर आपातकालीन स्थिति पैदा हुई तो जापान ताइवान की रक्षा करेगा। इस पर चीन की आक्रोश भरी टिप्पणी आई थी।
विज्ञापन


पर्यवेक्षकों का कहना है कि अतीत में आमतौर पर जापान इस बात की सावधानी बरतता था कि उसके किसी बयान से चीन आहत न हो। चीन जापान का सबसे बड़ा व्यापार सहयोगी है। लेकिन प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा सरकार ने पुरानी नीति में बदलाव किया है। ये बदलाव खास कर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन से उनकी मुलाकात के बाद आया। इसकी झलक पिछले महीने जापान के रक्षा मंत्री नोबुओ किशी के एक इंटरव्यू में भी मिली, जब उन्होंने ताइवान को जापान से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ बताया।

चीन ऐसे सभी बयानों को वन चाइना पॉलिसी के खिलाफ मानता है। उसकी राय में ऐसे बयानों का मतलब उसके हिस्से ताइवान की आजादी की वकालत है। अमेरिकी रुख पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पिछले हफ्ते चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा था- ‘बाइडन प्रशासन यह साफ करता जा रहा है कि वह सैनिक रूप से ताइवान का समर्थन करेगा। यह असंभव है कि चीन अमेरिकी रुख के साथ समझौता करे। ऐसे में इस बात की संभावना है कि अमेरिका और चीन के बीच टकराव पैदा हो।’ विश्लेषकों का कहना है कि अब जापान ने जो संकेत दिया है उसका मतलब है कि वह भी अपने को इस टकराव का हिस्सा बनाना चाहता है।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें