विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ईरान दौरे पर हैं। उन्होंने राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी और अपने ईरानी समकक्ष आमिर अब्दुल्लाहियान से मुलाकात की। डॉ जयशंकर ने इस्राइल हमास युद्ध के कारण पश्चिम एशियाई शहर गाजा में मानवीय संकट को रेखांकित किया। इसके अलावा भारत में फारसी भाषा के इस्तेमाल पर भी बात हुई।
ईरान दौरे पर विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी से मुलाकात की। उन्होंने राष्ट्रपति को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदेश के साथ-साथ शुभकामनाएं भी दीं। दो दिवसीय दौरे पर राजधानी तेहरान पहुंचे विदेश मंत्री ने ईरानी राष्ट्राध्यक्ष को ईरान की सरकार के मंत्रियों से हुई बातचीत के बारे में भी जानकारी दी। डॉ जयशंकर ने अपने ईरानी समकक्ष अमीर अब्दुल्लाहियन के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता भी की। इसमें जयशंकर ने गाजा में पैदा हुए मानवीय संकट को रेखांकित किया। उन्होंने उस क्षेत्र में बढ़ती सैन्य कार्रवाई से बचने पर भी जोर दिया।
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विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट पर लिखा, ईरान के राष्ट्रपति रईसी से मुलाकात कर सम्मानित महसूस कर रहा हूं। करमान हमले पर संवेदना प्रकट करने के अलावा ईरान के राष्ट्राध्यक्ष को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से भेजा गया शुभकामना संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि वे ईरान और भारत के संबंधों में उनके मार्गदर्शन को महत्व देते हैं। राष्ट्रपति से मुलाकात के पहले उन्होंने विदेश मंत्र डॉ हौसैन अमीर- अब्दुल्लाहियान से द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विस्तार से बात की। बैठक में राजनीतिक सहयोग, कनेक्टिविटी और दोनों देशों के नागरिकों के आपसी संपर्क पर भी बातचीत हुई।
भारत और ईरान के विदेश मंत्रियों के बीच विस्तार से हुई बातचीत
ईरान में द्विपक्षीय बैठक के दौरान विदेश मंत्री डॉ जयशंकर व अन्य
- फोटो : ANI
ईरानी विदेश मंत्री के साथ मुलाकात बाद डॉ जयशंकर ने उनके साथ संयुक्त प्रेस वार्ता की। उन्होंने कहा, गाजा में युद्ध के 100 दिन से अधिक बीत चुके हैं। मीडिल ईस्ट यान पश्चिम एशिया में मानवीय संकट साफ नजर आर रहा है। उन्होंने कहा कि सैन्य कार्रवाई पर अंकुश लगाकर तत्काल इस मानवीय संकट का समाधान तलाशने की जरूरत है। जयशंकर के मुताबिक दोनों के बीच द्विपक्षीय चर्चा चाबहार बंदरगाह और आईएनएसटीसी कनेक्टिविटी परियोजना के साथ समुद्र परिवहन में भारत की भागीदारी जैसे बिंदुओं पर केंद्रित रही। युद्धग्रस्त गाजा के हालात, अफगानिस्तान, यूक्रेन युद्ध और BRICS देशों से जुड़े मुद्दों पर भी बातचीत हुई। इसके अलावा क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाओं पर भी बातें हुईं।
मानवीय संकट से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी
ईरान के विदेश मंत्री के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान डॉ जयशंकर
- फोटो : ANI
विदेश मंत्री ने आतंकवाद के खिलाफ भारत का रूख भी साफ किया। उन्होंने कहा कि संकट के समय में मानवीय पहलुओं, विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित रखना अहम है। उन्होंने आतंकवाद के सभी स्वरूपों के खिलाफ भारत की स्थिति पर कहा कि हमने कभी इससे समझौता नहीं किया है। हमारा प्राथमिक ध्यान महिलाओं और बच्चों पर है। बकौल जयशंकर, मानवीय संकट से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है। उन्होंने कहा कि गाजा में स्पष्ट मानवीय संकट है जिसे संबोधित करने की जरूरत है। स्थायी मानवीय कॉरिडोर बनाना समय की मांग है। ईरान के विदेश मंत्री ने गाजा के युद्धग्रस्त इलाकों में मानवीय सहायता की खेप पहुंचाने के भारत के योगदान को भी स्वीकार किया। उन्होंने इसकी सराहना की।
इस्राइली सेना की कार्रवाई में कम से कम 24,100 लोग मारे गए हैं। हमले में 60,800 से अधिक घायल हुए हैं। 7 अक्तूबर को हमास के हमलों में इस्राइल के 1,139 लोग मारे गए।
फारसी भाषा भारत की चुनिंदा शास्त्रीय भाषाओं में शामिल; विदेश मंत्री ने बताया मकसद
ईरान में विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर
- फोटो : ANI
विदेश मंत्री डॉ जयशंकर के दौरे पर भारत और ईरान के सांस्कृतिक संबंधों को गहरा करने की पहल भी हुई। उन्होंने फारसी भाषा को लेकर बड़ी घोषणा की। विदेश मंत्री ने बताया कि भारत सरकार ने फारसी भाषा को भारत की नौ शास्त्रीय भाषाओं में एक के रूप में शामिल करने का फैसला लिया है। उन्होंने देश की नई शिक्षा नीति के साथ-साथ ईरान और भारत के सांस्कृतिक, साहित्यिक और भाषाई संबंधों पर भी प्रकाश डाला। विदेश मंत्री के मुताबिक सरकार के इस फैसले से भारतीय शैक्षिक ढांचे में फारसी की समृद्ध विरासत विरासत को बढ़ावा देने के प्रतिबद्धता का भी पता चलता है। तमिल पहली भारतीय भाषा थी, जिसे सरकार ने 2004 में शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया था। इसके बाद संस्कृत, कन्नड़, मलयालम और उड़िया जैसी भाषाओं को भी शास्त्रीय का दर्जा दिया गया है। सरकार के मुताबिक भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के मुताबिक पाली, फारसी और प्राकृत भाषाओं में रचे गए साहित्यों को भी संरक्षित करने का फैसला लिया गया है।