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Germany: म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में जब आमने-सामने आए भारत-चीन के विदेश मंत्री, जानें फिर क्या हुआ

Sun, 18 Feb 2024 10:07 AM IST
काव्या मिश्रा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, म्यूनिख

सार

विदेश मंत्री जयशंकर 'विश्व मित्र: ब्रिजिंग द डिवाइड' पर एक सत्र में भी शामिल हुए, जिसे नई दिल्ली स्थित थिंक टैंक ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) द्वारा होस्ट किया गया था।
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जयशंकर ने चीनी विदेश मंत्री यी से की संक्षिप्त बातचीत - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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भारत और चीन के बीच रिश्ते अच्छे नहीं है, यह किसी से छिपा नहीं है। आए दिन सीमा पर तनाव बना रहता है। इस बीच, जब म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन के दौरान भारत के विदेश मंत्री जयशंकर और चीनी विदेश मंत्री वांग यी आमने-सामने आए तो लोगों का सारा ध्यान उनकी ओर चला गया।

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बता दें, जयशंकर फिलहाल जर्मनी के म्यूनिख पहुंचे हुए हैं। यहां 16 से 18 फरवरी तक 60वां म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन से इतर, शनिवार को उनकी चीन के विदेश मंत्री वांग यी से संक्षिप्त बातचीत हुई। दोनों नेताओं को उस समय बातचीत करते हुए देखा गया जब वांग मंच से जा रहे थे और जयशंकर मंच पर मौजूद थे।

इसके अलावा, जयशंकर ने शनिवार को नॉर्वे के अपने समकक्ष एस्पेन बार्थ ईडे से भी मुलाकात कर बातचीत की। इतना ही नहीं, विदेश मंत्री जयशंकर 'विश्व मित्र: ब्रिजिंग द डिवाइड' पर एक सत्र में भी शामिल हुए, जिसे नई दिल्ली स्थित थिंक टैंक ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) द्वारा होस्ट किया गया था। 
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अमेरिकी विदेश मंत्री से यी कर चुके हैं बात
हालांकि, चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने शुक्रवार को म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन के साथ स्पष्ट एवं रचनात्मक चर्चा की थी। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने बताया कि दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर बातचीत की गई।

पिछले महीने चीन से नहीं डरने की कही थी बात
जयशंकर ने पिछले महीने आईआईएम मुंबई के एक कार्यक्रम में अपनी किताब 'व्हाई भारत मैटर्स' के बारे में कहा था कि वैश्विक राजनीति एक प्रतिस्पर्धात्मक खेल है और भारत को चीन से डरना नहीं चाहिए। इसके साथ ही शिकायत करने के बजाय बीजिंग से बेहतर करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि चीन एक 'प्रमुख अर्थव्यवस्था' होने के नाते अपने संसाधनों का इस्तेमाल करेगा और प्रतिस्पर्धी राजनीति के हिस्से के रूप में चीजों को अपने तरीके से आकार देने की कोशिश करेगा। उन्होंने कहा, 'चीन भी एक पड़ोसी देश है और कई मायनों में वह प्रतिस्पर्धी राजनीति के हिस्से के तौर पर इसे प्रभावित करेगा। मुझे नहीं लगता कि हमें चीन से डरना चाहिए। मुझे लगता है कि हमें कहना चाहिए, ठीक है वैश्विक राजनीति एक प्रतिस्पर्धी खेल है। आप अपना अच्छा कीजिए और मैं अपना अच्छा करूंगा।'

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